हम सब की हालत ऐसी ही है बोधिसत्व मुझसे उम्र में चौदह साल बढ़े हैं। लेकिन उन्होने आज की पोस्ट में कुछ ऐसी बातें लिख दीं, जिससे मुझे भी थोड़ी निराशा हो रही है। और इसे मानने में मुझे कोई एतराज नहीं है। उनकी पोस्ट पढ़ने के बाद आज फिर से जेहन में वो सभी पुरानी बातें उभर गईं जिससे मैं भूल चुका था। कॉलेज में मेरे कई अच्छे दोस्त थे और इसमें कुछ आज भी हैं। लेकिन उसी कॉलेज में कुछ ऐसे लोग भी थे जिनसे मेरी या कहें उनकी मुझसे नहीं बनती थी। क्यों नहीं बनती थी, इसका जवाब आज तक मेरे पास नहीं है। ऐसे ही मुंबई जब आया तो ऑफिस में भी कुछ गड़बढ़ हुई। जो मेरे सबसे प्रिय दोस्त थे वही मेरे दुश्मन बन गए। उन्हे लगने लगा कि मै बॉस का प्रिय हूं और मेरी वजह से उनके खास दोस्त की जॉब नहीं लग पाई। उनको लगता था कि मैं नहीं चाहता कि उनके दोस्त को जॉब मिले। समय बितता गया। गलतफहमियां बनती और मिटती गईं। कुछ पल साथ रहे लेकिन उनका यहां से छोड़कर जाना फिर से गलतफहमियों को बढ़ा दिया। अब वो मुझसे बात नहीं करते हैं जबकि कल तक उनका दावा था कि वो मेरे सबसे अच्छे दोस्त हैं। मुझे आज भी वो दोस्त लगते हैं लेकिन कुछ ...