मुंबई मेरा दूसरा प्यार है। पहले प्यार के बारें में बात न करें तो ही ज्यादा अच्छा है। मुंबई ने मुझे बहुत कुछ दिया है कम कीमत पर। खैर बातें तो होती होंगी। सबसे पहले खास बात। मुंबई की जीवन रेखा यानि मुंबई लोकल के अपने अनुभव को मैने शब्दों में बांधने का प्रयास किया। हालांकि यह बहुत मुश्किल काम था। फिर भी किया। जयपुर के डेली न्यूज में यह अनुभव प्रकाशित हुआ। पढ़कर जरा बताएं कि क्या खामियां रह गई हैं। आशीष महर्षि रेलवे स्टेशन पर भागमभाग मची हुई है। जिसे देखो वही भागा जा रहा है। कोई रुकने का नाम नहीं ले रहा है। स्टेशन खचाखच भरा हुआ। लड़कियों से लेकर बुजुर्ग तक भागे जा रहे हैं। सबको चिंता बस इस बात की है कि उनकी लोकल न छूट जाए। हालांकि यहां हर पांच मिनट में दूसरी लोकल है लेकिन इसके बावजूद लोग भाग रहे हैं। सुबह से लेकर देर रात तक मुंबई के तमाम स्टेशनों पर पैर रखने की जगह नहीं होती है। यह तो एक मात्र झलक है मुंबई की लोकल ट्रेन और इससे जुड़े लोगों की। मुंबई लोकल को शब्दों से बांधने का प्रयास नहीं किया जा सकता है। यह एक ऐसा अनुभव है जिसके लिए आपको खुद मुंबई आना होगा और लोकल में सफर करना...