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वो चौराहे के किसी न किसी रास्‍ते से वापस जरुर आएगी

वो चली गई। उसने एक बार भी उसे पीछे मुड़कर नहीं देखा। जबकि वो काफी देर तक उसी चौराहे पर खड़ा देखता रहा। उसे आस थी, वो मुड़ेगी और उसे हल्‍की नजर से देखेगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वो उसे भरपूर नजर से देखना चाह रहा था। कई दिन, कई महीने, कई बरस और कई सदिया बीत गई। लेकिन वो आज भी वहीं खड़ा है और उसका इंतजार कर रहा है। बस इसी आस में, कि वो चौराहे के किसी न किसी रास्‍ते से वापस जरुर आएगी। वो आज भी इंतजार कर रहा है।

Comments

हम भी इंतजार कर रहे हैं
Anonymous said…
क्या बात है ! जरूर आएगी ।
वहीं मत खड़े रहिये , आगे बढिये कहीं टकरा जायेगी , वापस नही आयेगी .........
rakhshanda said…
ye kahaani hai ya sach?
बंधु सुजाता जी खुद एक स्त्री होने के नाते शायद स्त्री मनोविज्ञान को हम-आपसे ज्यादा जानेंगी और इसी नाते वह सही सलाह दे रही है।
सो बढ़ लो आगे, खड़े नई रहने का!!

पहले भी कह चुका हूं, अब भी कह रहा हूं कहें आप इसे कल्पना लेकिन पुट है जरुर हकीकत का !!
PD said…
मेरी नजर में ये शत-प्रतिशत सच है.. एक भावनात्मक सत्य जो किसी के(खासकर पहला प्यार) चले जाने के बाद पता चलता है.. बस एक प्रश्न सामने आता है की क्या वो भी ऐसा ही सोचती/सोचता होगा जैसा हम सोचते हैं?
Anonymous said…
आशीष भाई, ये सच हो या ना हो, परंतु जीवन आगे बढ़ने का नाम.हम तो आगे बढ लिये. उसे भी बोलो कि आगे बढे बैशक कल्पना में या हकीकत में.
Udan Tashtari said…
क्या कहूँ..शुभकामनायें..मेरे अनुज हो वरना तो हँस देता तुम्हारे पागलपन पर..अभी स्नेह सा कुछ उमड़ रहा है. :)

सुन्दर पीस लिखा है.

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