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...लोग कहते हैं कि दूरियों से प्यार बढ़ता है
आखिर ऐसी दूरियां किस काम की
जहां प्यार बढ़ाने के लिए फासलों का सहारा लेना पड़े

सोचा था तुमसे दूर जाऊंगा
तो तुम मेरे और करीब आओगी
मैं दूर जाता रहा, तुम दूर जाती रही

एक दिन प्यार दूरियों में ऐसा बदला
कि मैं चाह कर भी तुम्हें वापस ना पा सके
सोचा था कि मैं तुम्हें मना लूंगा, घर ले आऊंगा
मैं गलत था, तुम जा चुकी थी बहुत दूर

Comments

leftover said…
bahut acchi kavita...
Neeloo patni said…
Kitni sach hai yeh Kavita
Mahi S said…
I have bookmarked you to check out new stuff you post. Nice blog...

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मै जरुर वापस आऊंगा

समझ में नहीं आ रहा कि शुरुआत क्‍हां से और कैसे करुं। लेकिन शुरुआत तो करनी होगी। मुंबई में दो साल हो गए हैं और अब इस श‍हर को छोड़कर जाना पड़ रहा है। यह मेरी सबसे बड़ी कमजोरी है कि मैं जहां भी रहता हूं उसके मोह में बंध जाता हूं। बनारस से राजस्‍थान आते भी ऐसा ही कुछ महसूस हुआ था। फिर जयपुर से भोपाल जाते हुए दिल को तकलीफ हुई थी। इसके बाद भोपाल से मुंबई आते हुए भोपाल और दोस्‍तों को छोड़ते हुए डर लग रहा था। और आज मुंबई छोड़ते हुए अच्‍छा नहीं लग रहा है। मैं बार बार लिखता रहा हूं कि मुंबई मेरा दूसरा प्‍यार है। और किसी भी प्‍यार को छोडते हुए विरह की अग्नि में जलना बड़ा कष्‍टदायक होता है। इस शहर ने मुझे बहुत कुछ दिया। इस शहर से मुझे एक अस्तिव मिला। कुछ वक्‍त उसके साथ गुजारने का मौका मिला, जिसके साथ मैने सोचा भी नहीं था। मुंबई पर कई लेख लिखते वक्‍त इस शहरों को पूरी तरह मैने जिया है। लेकिन अब छोड़कर जाना पड़ रहा है। बचपन से लेकर अब तक कई शहरों में जिंदगी बसर करने का मौका मिला। लेकिन बनारस और मुंबई ही दो ऐसे शहर हैं जो मेरे मिजाज से मेल खाते हैं। बाकी शहरों में थोड़ी सी बोरियत होती है लेकिन यहां ऐसा ...

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मीडिया - मैसेज - सेक्स

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