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उस मोड़ पर वो फिर जुदा हुए

वो मिले और कुछ पल साथ गुजारे। लेकिन वो दोनों एक ऐसे मोड़ पर जुदा हुए, जहां से न उसने मुड़ कर देखा और न देखने की कोशिश भी की। लेकिन एक वो था जो बार बार उस मोड़ से मुड़कर उसे जाता हुआ देख रहा था। उसके दिल में आया उसे वो रोके लेकिन उसे पता था कि वो नहीं रूकेगी। आंखों के साथ दिल भी भर आया था उसे जाता देखकर। कुछ नहीं कर पाया वो और वो चली जा रही थी और चली गई। ऐसा न जाने कितनी बार हुआ है कि सर्द मौसम से लेकर तपतपाती गर्मी में उसे कितने लोगों ने ऐसे ही मोड़ पर छोड़ कर गए हैं। और वो बार बार उस मोड़ पर उनका इंतजार करता है। लेकिन इस बार उसे कुछ अधिक ही तकलीफ हो रही थी। उसके जाने के साथ एक बार फिर वो अकेला हो गया था। दिल में कई अधूरी हसरते पाले वो इस शहर में आया था लेकिन हसरतें फिर अधूरी ही रहीं। उसने सोचा था, उससे मिलेगा तो दिल की सब बात जुबां पर रख देगा लेकिन उसके सामने आते ही वो उसकी गहरी आंखों में डूबता गया और जब तक संभलता, काफी देर हो चुकी थी। वो उस मोड़ पर उसे आगे अकेला जाने के लिए छोड़कर चली गई थी।

Comments

मर्मस्पर्शी........
Anonymous said…
bus ho gya
Unknown said…
जो आने वाले हैं मौसम उन्हें शुमार में रख
जो दिन गुजर गये उन्हें गिना नहीं करते।
DUSHYANT said…
डॉ बशीर बद्र फरमाते हैं -

वो नही मिला तो मलाल क्या , जो गुजर गया सो गुजर गया ।
उसे याद करके ना दिल दुखा ,जो गुजर गया सो गुजर गया ।

ना गिला किया ना ख़फा हुए , युँ ही रास्ते में जुदा हुए ,
ना तू बेवफा ना मैं बेवफा , जो गुजर गया सो गुजर गया ।

तुझे एतबारों-य़कीन नहीं , नहीं दुनिया इतनी बुरी नहीं ,
ना मलाल कर , मेरे साथ आ, जो गुजर गया सो गुजर गया ।

वो वफाऐं थी ,या ज़फाऐं थी , ये ना सोच किस की खंताऐ थी ,
वो तेरा हैं , उसको गले लगा , जो गुजर गया सो गुजर गया ।
PD said…
आशीष जी, मैं मजाक नहीं कर रहा हूं.. आप जिसके लिये ये सब लिख रहें हैं उसने आपको ब्लौग को गूगल की नजर में संदेह की दृष्टी में ला खड़ा कर दिया है..

वैसे आपका लिखा पसंद आया..

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