चलिए आज मिलवाते हैं उन क्रिकेटरों से, जिन पर पूरे भारत वर्ष को गर्व है। आज गरीबी, भूखमरी जैसे मुद्वों के लिए न तो मीडिया में जगह है और न ब्लॉग पर। हर जगह तो बस क्रिकेट का ही जलवा है। लोग भूख से मरते हैं तो मरने दिजीए। देश की 33 फीसदी से अधिक आबादी गरीबी रेखा के नीचे है, रहने दिजीए। हम सब बस बैठकर किक्रेट देखते हैं और हमारे क्रिकेटर कुछ और।
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