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दोस्ती और विश्वासघात में अन्तर होता है

दोस्ती और विश्वासघात में अन्तर होता है
यह तो सब जानते हैं
मैं भी और आप भी
लेकिन इसे क्या कहेंगे आप
जब आपका सबसे प्यारा दोस्त
आपके साथ वो करे
जो दुश्मन भी नहीं करता है
जी हाँ मैं अपने सबसे प्यारे दोस्त की बात कर रहा हूँ
मैंने उसकी दोस्ती को इबारत समझा
और उसने हर मोड़ पर मुझे ठगा
मैं आज भी उसपर विश्वास करना चाहता हूँ
लेकिन करूँ या नहीं करूँ
अजीब सी उलझन है

Comments

Rajesh Roshan said…
मर्म थोड़ा जुदा है. वैसे विश्वासघात की वर्तनी पर ध्यान दे
-राजेश रोशन
Anonymous said…
ऐसे लोग दोस्ती के नाम पर कलंक है
Udan Tashtari said…
आप अभी भी दोस्त कह रहे हैं??
आलोक said…
विश्वासघात तो वही करेगा न जिसपर विश्वास हो।
Anonymous said…
dosti jaise lafj aur ashish mahrshi/jaipuriya/banarasi/bhopali/..... ke munh se?????????????????????????
करलो....करने से ही यह दुनिया है....
विश्वास को टूटने न देना ही अपने आप मे विश्वास को ज़िन्दा रखना है. उलझन को झटक दीजिए और विश्वास पर अटल रहिए. आपका प्यारा दोस्त एक दिन आपके प्यार की इबारत को ज़रूर समझेगा. (कविता की व्याख्या या सत्य नही मालूम)