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Showing posts from July, 2011

लघु कथा : जिंदगी की परीक्षा

सुबह होने में देर हो सकती थी लेकिन उसके उठने में आज तक देर नहीं हुई। गर्मी, बरसात, ठंड कोई भी उसका रास्ता नहीं रोक पाया था आज तक।
वह हर रोज स्कूल खुलने से पहले ही पहुंच जाता था। वह उसका स्कूल नहीं था। फिर भी वह स्कूल के सामने वाली चाय की दुकान पर खड़ा हो जाता था
स्कूल खुलने से पहले। वह आती। रिक्शे से उतरती और अपनी सहेलियों से बात करते हुए अंदर चली जाती है। स्कूल का गेट किसी जेल की तरह बंद हो जाता है। उसे देखते ही उसके दिल की धड़कन बढ़ जाती है। आंखों में चमक आ जाती है।
ऐसा ही हर रोज चलता।
परीक्षा आई। गई। रिजल्ट आया। वह बहुत खुश था। वह प्रथम श्रेणी से पास हो गई थी। वाह और क्या चाहिए?
रोज की तरह वह उस दिन भी स्कूल खुलने से पहले उस चाय की दुकान पर पहुंच गया था। वह नहीं दिखी। ऐसे ही कई दिन महीनों में बदल गए। वह नहीं आई। उसके आंखों की चमक जा चुकी थी। दिल लेकिन फिर भी धड़क रहा था।
वह उसके घर पहुंचा तो वहां मातम की खामोशी छाई हुई थी। ढेर सारे रिश्तेदारे-नातेदार कल ही गए हैं। वह भी जा चुकी थी। कल उसे गए पूरे तेरह दिन हो गए थे। वह न सिर्फ स्कूल की परीक्षा में फेल हुआ बल्कि जिंदगी की परीक्षा मे…