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Showing posts from September, 2011

कविता

मैं फिर से जीने लगा हूँ
क्यूंकि फिर से कविता लिखने लगा हूं..
मैं उसे गुनगुनाता हूं
अकेले पड़ने पर जोर जोर से अपनी ही लिखी
एक एक लाइनों को चिलाता हूं..
मैं फिर से कविता लिखने लगा हूं..
मेरी कविताओं में केवल और केवल तुम हो
लेकिन तुम कौन!
हाँ याद आया
तुम मतलब मैं
क्यूंकि मुझसे ही तुम हो
और तुमसे मैं
तुम मुझसे दूर जा सकती हो
लेकिन खुद से कैसे?
क्यूंकि तुम्हारे एक एक अहसास में मैं ही मैं हूं