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Showing posts with the label मुंबई

ए लव स्टोरी एट फेसबुक - 1

देर रात जैसे ही उसे फेसबुक खोला, इनबॉक्स में एक मैसेज था किसी अमित का। अमित ने उसे एड करने की रिक्वेस्ट भेजी थी। उसने पहले उसे इगनोर करने की कोशिश की फिर उसकी प्रोफाइल में जाकर और डिटेल खोजने लगी। अमित के एबाउट मी को पढ़कर वह खुद को उसे एड करने से नहीं रोक पाई। एबाउट मी में लिखा था.मेरे आसपास हर पल बहुत कुछ घटता है लेकिन मैं बिखरता नहीं हूं। बल्कि आसमां की तरह मेरा और विस्तार होता जाता है और सागर की तरह और गहरा। रात गई, बात गई। अगली सुबह जब वह ऑफिस पहुंची तो अचानक उसके मोबाइल ने बीप किया। फेसबुक पर कोई मैसेज था। यह मैसेज अमित का था। उसने थैक यूं लिखा था। वह तुंरत अपने केबिन की ओर मुड़ी और लैपटॉप ऑन करने के साथ ही फेसबुक लॉग किया। वह ऑनलाइन का। बातों का सिलसिला निकल पड़ा। ऐसे ही कई दिन और रात बीत गई। अब अमित और वह अच्छे दोस्त बन चुके थे। दोनों ने अपने-अपने नंबर भी शेयर कर चुके थे एक दूसरे से। लेकिन अब तक फोन पर बात नहीं हुई थी। वह बरसात की शाम की। शहर को पहली बार बारिश ने भिगोया था। कार ड्राइव करते हुए वह घर की ओर लौट रही थी। अचानक उसका मोबाइल बजा। यह अमित का कॉल था। वह उससे मिलना चाहता...

मुंबई डायरी

कई महीनों पहले एक अंग्रेजी के अखबार में पढ़ा था कि न्‍यूयार्क और लंदन के बाद मुंबई ही एक मात्र ऐसा शहर है जो आपको जीरो से हीरो बना सकता है। बस कूबत आपमें होनी चाहिए। ऐसा मुझे भी लगता है। आज ही लग रहा है, ऐसा नहीं है। मुंबई में जब पहली बार कदम रखा था तो यहां की आसमान छूती इमारतों को देख कर मन में एक अजीब सा भाव उठ रहा था। दिल्‍ली की तुलना में यह शहर कुछ अधिक बेहतर है। यहां दिखावा उतना नहीं है, जितना की दिल्‍ली में देखने को मिलता है। दिल्‍ली में जब आप प्रवेश करते हैं तो चारों ओर खुलापन दिख है। मुंबई में ऐसा नहीं है। जब आप यहां के वीटी या दादर जैसे प्रमुख रेलवे स्‍टेशन में प्रवेश करते हैं तो चारों ओर जनसैलाब के साथ बड़ी बड़ी इमारतें आपका स्‍वागत करती हैं। सब भागे जा रहे हैं। वक्‍त की कमी है। एक के बाद एक लोकल ट्रेन अपने अंदर से भीड़ को उगलती हैं और निगलती हैं। पहली पहली बार सब कुछ अजीब सा लगता है। यदि आपका दिल कमजोर है तो बस आप यही चाहेंगे कि दूसरी ट्रेन पकड़ कर गांव या उस शहर को लौट जाएं जहां से आएं है। लेकिन एक बार जब आप इस शहर में कदम रख देते हैं तो अपने आप हमारों ख्‍वाब आपके अंदर उमड़...

मै जरुर वापस आऊंगा

समझ में नहीं आ रहा कि शुरुआत क्‍हां से और कैसे करुं। लेकिन शुरुआत तो करनी होगी। मुंबई में दो साल हो गए हैं और अब इस श‍हर को छोड़कर जाना पड़ रहा है। यह मेरी सबसे बड़ी कमजोरी है कि मैं जहां भी रहता हूं उसके मोह में बंध जाता हूं। बनारस से राजस्‍थान आते भी ऐसा ही कुछ महसूस हुआ था। फिर जयपुर से भोपाल जाते हुए दिल को तकलीफ हुई थी। इसके बाद भोपाल से मुंबई आते हुए भोपाल और दोस्‍तों को छोड़ते हुए डर लग रहा था। और आज मुंबई छोड़ते हुए अच्‍छा नहीं लग रहा है। मैं बार बार लिखता रहा हूं कि मुंबई मेरा दूसरा प्‍यार है। और किसी भी प्‍यार को छोडते हुए विरह की अग्नि में जलना बड़ा कष्‍टदायक होता है। इस शहर ने मुझे बहुत कुछ दिया। इस शहर से मुझे एक अस्तिव मिला। कुछ वक्‍त उसके साथ गुजारने का मौका मिला, जिसके साथ मैने सोचा भी नहीं था। मुंबई पर कई लेख लिखते वक्‍त इस शहरों को पूरी तरह मैने जिया है। लेकिन अब छोड़कर जाना पड़ रहा है। बचपन से लेकर अब तक कई शहरों में जिंदगी बसर करने का मौका मिला। लेकिन बनारस और मुंबई ही दो ऐसे शहर हैं जो मेरे मिजाज से मेल खाते हैं। बाकी शहरों में थोड़ी सी बोरियत होती है लेकिन यहां ऐसा ...

लड़कियां मुंबई की सड़कों पर क्‍यों नहीं निकलें

31 दिसंबर की देर रात मुंबई में जो दो महिलाओं के साथ सत्‍तर अस्‍सी लोगों की भीड़ ने जो कुछ किया, वह शर्मनाक था लेकिन इसी के साथ एक नई बहस छिड़ गई है। ब्‍लॉग की दुनिया में कई लोगों ने इस पर लिखा और कमेंट के रुप में कई लोगों ने अपनी अपनी राय। कुछ ने इसे शर्मसार करने वाली घटना बताई तो किसी ने संस्‍कृति के ठेकेदारों पर सवालिया निशान उठाया। किसी ने इन लड़कियों के बहाने पूरे समाज के सामने यह सवाल उठा दिया कि महिलाओं को देर रात सड़क पर नहीं निकलना चाहिए क्‍योंकि यह हमारी संस्‍कृति में नहीं है। खैर सब ने अपने अपने अनुसार अपनी राय दी। कुछ बातों से मैं सहमत हूं और कुछ से नहीं। लेकिन मैं सभी लोगों का तहेदिल से आभारी हूं कि इन्‍होंने पूरी ईमानदारी से अपनी राय दी। अरे मुंबई तूने यह क्‍या कर डाला नामक शीर्षक खबर के लिए यहां क्लिक करें वाह मनी ब्‍लॉग के कमल शर्मा ने कहा कि भाई शहर सुरक्षित हो या असुरक्षित....रात में पौने दो बजे तो किसी के भी घूमने के लिए ठीक नहीं है। इन महिलाओं के साथ जो अभद्रता हुई वह शर्मनाक है और छेड़ने वालों को खोजकर कानूनी कारईवाई होनी चाहिए। लेकिन इन महिलाओं और इनके पुरुष मित...

मुंबई का कड़वा सच

मुंबई या‍नि मायानगरी। मुंबई का नाम लेते ही हमारे जेहन में एक उस शहर की तस्‍वीर सामने आती हैं जहां हर रोज लाखों लोग अपने सपनों के संग आते हैं और फिर जी जान से जुट जाते हैं उन सपनों को साकार करने के लिए। मुंबई जानी जाती है कि हमेशा एक जागते हुए शहर में। वो शहर जो कभी नहीं सोता है, मुंबई सिर्फ जगमगाता ही है। लेकिन मुंबई में ही एक और भी दुनिया है जो कि हमें नहीं दिखती है। जी हां मैं बात कर रहा हूं बोरिवली के आसपास के जंगलों में रहने वाले उन आदिवासियों की जो कि पिछले दिनों राष्‍ट्रीय खबर में छाए रहे अपनी गरीबी और तंगहाली को लेकर। आप सोच रहे होंगे कि कंक्रीट के जंगलों में असली जंगल और आदिवासी। दिमाग पर अधिक जोर लगाने का प्रयास करना बेकार है। मुंबई के बोरिवली जहां राजीव गांधी के नाम पर एक राष्ट्रीय पार्क है। इस पार्क में कुछ आदिवासियों के गांव हैं, जो कि सैकड़ो सालों से इन जंगलों में हैं। आज पर्याप्‍त कमाई नहीं हो पाने के कारण इनके बच्‍चे कुपो‍षित हैं, महिलाओं की स्थिति भी कोई खास नहीं है। पार्क में आने वाले जो अपना झूठा खाना फेंक देते हैं, बच्‍चे उन्‍हें खा कर गुजारा कर लेते हैं। आदिवासी आदम...