देश मॆं प्रजातंत्र हैं. ऐसे में सबको अपनी बात रखने का हक हैं. एक ऐसी ही बात आज सुबह सुबह मुझे ई मेल पर पढ़ने को मिली. किसी राम कोहली ने लिखी हैं. मैंने उस विचार को पढ़ा अब आप भी पढ़िए उधार का ज्ञान, अपनों का अपमान ---- नरेंद्र कोहली मैं एएसआई वालों से पूछना चाहूंगा कि क्या वे दस-पंद्रह पीढ़ी पहले के अपने पूर्वजों का प्रमाण दे सकते हैं? रामसेतु के बहाने रामायण के पात्रों को काल्पनिक बताकर केंद्र सरकार ने फिर हिंदुओं को क्लेश दिया है। मैं सोनिया गांधी की बात नहीं करता, किंतु प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तो इसी देश के हैं। वह क्यों नहीं बोलते? इस देश में तो जैसे माफिया राज चल रहा है। हिंदू की छाती पर बैठकर उसका उपहास उड़ाया जा रहा है। अर्जुन सिंह जैसे लोग हैं जो कुछ संगठनों को पैसे देकर रामकथा के खिलाफ प्रदर्शनी लगवाते हैं। क्या किसी और देश में वहां के धर्मग्रंथों के बारे में ऐसी बातें कही जा सकती हैं? पश्चिम के लोगों ने कहा कि मूसा ने तूर पर्वत पर प्रकाश देखा तो हमने भी मान लिया, कोई सवाल तो नहीं उठाया। भारत में सरकार हिंदुओं से द्वेष रखती है, हिंदूद्रोही है। हिंदुओं का जितना उत्पीड़न अब हो रह...