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बाबा की एक कविता -- अकाल और उसके बाद

नागार्जुन मेरे प्रिय कवियों में से एक हैं। जब कभी मैं सोचता हूं बाबा नागार्जुन कि कविताएं मुझे क्‍यों पसंद हैं तो जवाब भी उन्‍हीं की कविताएं दे देती हैं। नागार्जुन की कविता आम आदमी की कविता है। जिसे समझने के लिए आपको संवेदनशील होना जरुरी है। यदि आप आम आदमी का दर्द महसूस नहीं कर सकते हो तो उनकी कविता आपके किसी के काम की नहीं है। पेश है उन्‍हीं की प्रसिद्व कविता अकाल और उसके बाद । कई दिनों तक चूल्हा रोया, चक्की रही उदास कई दिनों तक कानी कुतिया सोई उनके पास कई दिनों तक लगी भीत पर छिपकलियों की गश्त कई दिनों तक चूहों की भी हालत रही शिकस्त । दाने आए घर के अंदर कई दिनों के बाद धुआँ उठा आँगन से ऊपर कई दिनों के बाद चमक उठी घर भर की आँखें कई दिनों के बाद कौए ने खुजलाई पाँखें कई दिनों के बाद ।