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मनाली और मेरे अनुभव

जब हम हिमाचल की खूबसूरत वादियों में मनाली की फिजा में होते हैं तो जावेद अख्तर का लिखा ये गीत हमेशा हमारी जुबान पर होता है-वो देखो जरा परबतों पे घटाएं, हमारी दास्तान हौले से सुनाए... आपको यकीन ना आए तो इस बार जरा हो के आइए... आप मानेंगे कि हमने गलत नहीं कहा था... मेरी नजर से मनाली खूबसूरत वादियां, बर्फ से ढंके पहाड़, उबड़-खाबड़ पथरीले रास्ते, नागिन की तरह बलखाती घाटियां, सड़क के किनारे कभी दाएं तो कभी बाएं बहती खूबसूरत व्यास नदी। हिमाचल की सीमा शुरू होते ही यह किस्सा आपके साथ चलता है। लेकिन लक्ष्य एक ही था कि जल्दी से जल्दी कुल्लू-मनाली पहुंचना है। कुल्लू में घुसते ही दूर खड़े बर्फीले पहाड़ों पर जब नजर पड़ी तो नजरों को यकीन नहीं हुआ। कुल्लू-मनाली यदि आप जाने की कोई योजना बना रहे हैं तो सब कुछ भूलकर ही वहां जाएं। क्योंकि वहां जाने के बाद आप खुद को जन्नत में पाएंगे। और जब वापस आएंगे तो फिर से खुद को जहन्नुम में पाएंगे। देर शाम जब मैं मनाली पहुंचा तो वहां के बाजार अपने शबाब पर थे। एक छोटा सा कस्बा मनाली दुनियाभर के टूरिस्टों से भरा पड़ा था। हर दुकान पर पर्यटकों की अच्छी खासी भीड़ और सामान ...