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Showing posts from July, 2008

इंदौर को मेरा पहला सलाम

मुंबई से भोपाल और अब इंदौर में अपना डेरा जम गया है। अब देखने वाली बात यह है की मालवा की जमीं से मुझे कितना प्यार मिलता है। आज पहला दिन शानदार रहा। मैंने पहले ही दिन इस शहर को अपना मान लिया है और शायद यहाँ के रहवाशी भी मुझे अपना मानकर बेपनाह मोहब्बत दें। इंदौर के सभी ब्लोगेर्स से मेरा विन्रम अनुरोध है कि मुझे भी अपनी जमात में शामिल कर लें। आज सुबह जैसे ही यहाँ की सरजमीं पर कदम रखा तो पानी की बूंदों ने कहा कि बिना नहाये यहाँ किसी को प्रवेश नही है सो मुझे भीगना ही था। और यही कारण रहा की मैं पूरी तरह अभी भी फ्रेश महसूस कर रहा हूँ। जबकि वक्त बहुत अधिक हो गया है।

मेरे वो सबसे प्यारे दोस्त

कुछ बातें आज भी मेरी समझ में नहीं आती हैंै। कुछ के लिए अैं आज भी खलनायक हूं। वो मुझसे बेपनाह नफरत करते हैं और मैं चाह रहा हूं कि उनकी इस नफरत को प्यार में बदल दूंगा। लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है। मैने अपने कई ऐसे दोस्त इसी कारण खो दिए हैं। कई बार मैं ही जिम्मेदार था लेकिन कभी मैं नहींं था जिम्मेदार। खैर बस ख्ुादा से इतनी ही दुआ करता हूं मुझे मेरे वो सब दोस्त वापस कर दें जिन्हें मैं खो चुका हूं। इसमें मेरे वो सबसे प्यारे दोस्त भी हैं जो मुझे कालेज लाइफ में मिले थे।

अब जी कर क्या किया जाए

वो चाहती थी कि मैं उसके साथ एक दोस्त जैसा ही बर्ताव करूं। लेकिन यह मेरे लिए संभव नहीं था। मैं उसे चाहता हूं। खैर हर किसी के चाहने से यदि खुदा मिलने लगता तो खुदा की औकात की क्या रह जाती। फिर भी लोग खुदा को जमीन पर लाने की जिद्द करते हैं। और मैं उस पागल लडक़ी के दिल में अपने लिए थोड़ी सी जगह बनाने का प्रयास कर रहा हूं पिछले कई बरस से। लेकिन कम्बख्त उसके दिल में मेरे लिए जगह ही नहीं है। उस बेगाने शहर को छोडक़र यहां आया। लेकिन दिल-ए-नादान को चैन यहां भी नहीं। जिस गली से गुजरता हूं, उसके होने का अहसास महसूस होता है। सोच रहा हूं अब यह शहर भी छोड़ दूं। आपकी क्या राय है। अब दुनिया से भी रुखसत होने का वक्त आ गया है।
नोट-कहानी

थोड़ी सी बात मिर्च मसाला

आप यकीन मानिए, यह मेरी कहानी नहीं है। यह कहानी हर उस शख्स थी जो कभी भी कहीं न कहीं किसी न किसी से प्यार करता था, करता है और करता रहेगा। यह बस एकतरफा प्रेम कहानी है। चलिए अब अधिक नहीं पकाते हुए शुरु करता हूं। बात उस वक्त की है जब बारिश की पहली बूंदें जमीन पर पड़ती हैं। इसके बाद पूरा माहौल मिट्टी की सौंधी खूश्बू से महक उठता है। दोनों एक साथ कालेज से निकले थे। काम की तलाश में वो बंबई चला गया और वो इसी शहर में रह गई। वक्त बदला और साथ में कई बातें बदल गई। जो कल तक एक दूसरे के लिए जान देते थे, आज जान लेने पर तुले हैं। वजह साफ है। वो अब उसे नहीं चाहती है। उसकी जिंदगी में और कोई आ गया है। जी हां और कोई आ गया है। आपको सुनाई दिया या नहीं। खैर बात आगें बढ़ाता हूं। बंबई छोडक़र वो वापस अपने पुराने शहर में आ गया। उम्मीद थी कि वो उसे स्वीकार कर लेगी। लेकिन नहीं वो गलत था। वो भी सही थी। दोनों की मुलाकात ऐसे वक्त हुई जहां होनी नहीं चाहिए थी। आगे की बात आज नहीं कल।

प्यार, मोहब्बत और वो

आप यकिन कीजिए मुझे प्यार हो गया है. दिक्कत बस इतनी सी है कि उनकी उमर मुझसे थोडी सी ज्यादा है. मैं २५ बरस का हूँ और उन्होंने ४५ वा बसंत पार किया है. पेशे से वो डाक्टर हैं. इसी शहर में रहती हैं. सोचता हूँ अपनी मोहब्बत का इज़हार कर ही दूँ. लेकिन डर भी सता रहा है. यदि उन्होंने ना कर दिया तो. खैर यह उनका विशेषाधिकार भी है. उनसे पहली मुलाकात एक स्टोरी के चक्कर में हुई थी. शहर में किसी डाक्टर का कमेन्ट चाहिए था. सामने एक अस्पताल दिखा और धुस गया मैं अन्दर. बस वहीं उनसे पहली बार मुलाकात हुई. इसके बाद आए दिन मुलाकातें बढती गई. यकीं मानिये उनका साथ उनकी बातें मुझे शानदार लगती हैं. मैं उनसे मिलने का कोई बहाना नहीं छोड़ता हूँ. अब आप ही बताएं मैं क्या करूँ..