लच्छू महाराज... आप भले ही इस दुनिया को अलविदा कह गए हों, लेकिन आपने जो प्यार और पहचान इस बनारस को दिया है, उसे कोई कैसे भुला सकता है। बनारस सिर्फ एक शहर नहीं है। बनारस वो रस है जिसे सिर्फ वही महसूस कर सकता है जो इसकी मिट्टी की खुशबू को जानता हो। इसकी खुशबू को जानने के लिए आपको बनारस का होना पड़ेगा। बनारस की संकरी गलियां अपने आप में बहुत कुछ समेटे हैं। यहां हर गली, हर मुहल्ले में आपको ऐतिहासिक धरोहर मिलेगी, लेकिन कई बार उसकी कीमत हम तब जानते हैं जब ऐसा शख्स या तो हमसे जुदा हो जाता है या फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना लेता है और हम अपने ही रत्नों से अनजान बने रह जाते हैं। ये कोई इत्तेफाक नहीं। बनारस के घाटों पर आप हर वो रंग देख सकते हैं जिसकी चाहत लिए आप यहां आते हैं। सुबह-शाम मंदिर और मस्जिद से एक साथ घंटा और अजान अगर कहीं सुनने को मिलता है तो वो शहर बनारस ही है। शहनाई वादक बिस्मिल्लाह खान सुबह-शाम बनारस शिव मंदिर में अपनी शहनाई की तान सुनाते थे और दुनिया सुध-बुध खोकर शहनाई की आवाज में खो जाती थी। बिस्मिल्लाह खान और बनारस एक-दूसरे के पर्याय बन चुके थे। चाहे कैसा भी अव...