Skip to main content

बाबा की एक कविता -- अकाल और उसके बाद

नागार्जुन मेरे प्रिय कवियों में से एक हैं। जब कभी मैं सोचता हूं बाबा नागार्जुन कि कविताएं मुझे क्‍यों पसंद हैं तो जवाब भी उन्‍हीं की कविताएं दे देती हैं। नागार्जुन की कविता आम आदमी की कविता है। जिसे समझने के लिए आपको संवेदनशील होना जरुरी है। यदि आप आम आदमी का दर्द महसूस नहीं कर सकते हो तो उनकी कविता आपके किसी के काम की नहीं है। पेश है उन्‍हीं की प्रसिद्व कविता अकाल और उसके बाद ।

कई दिनों तक चूल्हा रोया, चक्की रही उदास
कई दिनों तक कानी कुतिया सोई उनके पास
कई दिनों तक लगी भीत पर छिपकलियों की गश्त
कई दिनों तक चूहों की भी हालत रही शिकस्त ।
दाने आए घर के अंदर कई दिनों के बाद
धुआँ उठा आँगन से ऊपर कई दिनों के बाद
चमक उठी घर भर की आँखें कई दिनों के बाद
कौए ने खुजलाई पाँखें कई दिनों के बाद ।

Comments

yunus said…
बचपन में 'बाल भारती' में ये कविता शामिल थी । तब से याद भी है और याद भी आती है । इस कविता को पढ़कर मन में कितनी कितनी छबियां बन जाती हैं ।
प्रिये आशीष
बहुत अच्छा लगता है जब किसी युवा के ब्लॉग पर इतनी संवेदनशील रचना पढने को मिलती है.इस आपाधापी भरे जीवन में संवेदनाएं तलाशना बहुत मुश्किल काम है. आप को साधुवाद.
आप मेरे ब्लॉग पर आए ग़ज़ल पसंद की उसके लिए शुक्रिया.
मैं मिष्टी का दादा हूँ और वो हमारे परिवार की सबसे छोटी सदस्या है.
नीरज
mamta said…
अच्छी और भावपूर्ण कविता !!
ajeet said…
Parnam Sir,
Filhaal to main ek pathak hoon aur aapke likhe aur samajik sarokaron se khud ko juda pata hoon. aaj bbchindi mein ek lekh hai...'ek bujurg aavishkarak ki mushkil'....wo bahut hi achchha aur prernadayak lekh hai....main chahta hoon ki aap is par kuchh likhen....main us page ka link yahan par de raha hoon....aur haan post se itar tippani ke liye mafi chahta hoon....Ajeet

http://www.bbc.co.uk/hindi/regionalnews/story/2008/03/080305_bihar_inventor.shtml

Popular posts from this blog

#DigitalGyan : Sarahah के बारे में जानिए सबकुछ

'सराहा' दुनियाभर में तहलका मचाने के बाद अब हिंदुस्तान में छा गया है। जिसे देखिए, वो इसका दीवाना बन चुका है। सऊदी अरब में बनाए गए एप सराहा को दुनियाभर में यूजर्स काफी पसंद कर रहे हैं । करीब एक महीने पहले लॉन्च हुए इस एप को 50 लाख से ज्यादा बार डाउनलोड किया गया है। खास बात यह है कि एप बनाने वाली इस स्टार्टअप को सिर्फ तीन लोग चलाते हैं। इनमें 29 साल के जेन अल-अबीदीन तौफीक और उनके दो दोस्त शामिल हैं।  इस एप के जरिये यूजर अपनी प्रोफाइल से जुड़े किसी भी व्यक्ति को मैसेज भेज सकते हैं। लेकिन सबसे मजेदार यह है कि मैसेज पाने वाले को यह पता नहीं चलेगा कि ये मैसेज किसके पास से आया है। जाहिर है, इसका जवाब भी नहीं दिया जा सकता। और यही कारण है कि ये ऐप लोगों के बीच बहुत तेज़ी से लोकप्रिय होता जा रहा है। सराहा एक अरबी शब्द है, जिसका मतलब ‘ईमानदारी’ होता है। तौफिक ने बताया ‘एप बनाने का मकसद यह है कि इसके जरिये कोई कर्मचारी, बॉस या वरिष्ठ को बिना झिझक अपनी राय दे सके। यूजर किसी व्यक्ति से वो सब कह सकें जो उनके सामने आकर नहीं कह सकते। ऐसा हो सकता है कि वे जो कह रहे हैं उसे सुनना उन्हें अच्छा न ल…

दोस्ती और विश्वासघात में अन्तर होता है

दोस्ती और विश्वासघात में अन्तर होता है
यह तो सब जानते हैं
मैं भी और आप भी
लेकिन इसे क्या कहेंगे आप
जब आपका सबसे प्यारा दोस्त
आपके साथ वो करे
जो दुश्मन भी नहीं करता है
जी हाँ मैं अपने सबसे प्यारे दोस्त की बात कर रहा हूँ
मैंने उसकी दोस्ती को इबारत समझा
और उसने हर मोड़ पर मुझे ठगा
मैं आज भी उसपर विश्वास करना चाहता हूँ
लेकिन करूँ या नहीं करूँ
अजीब सी उलझन है

हम जी रहे हैं। क्यों जी रहे हैं?

हम जी रहे हैं। क्यों जी रहे हैं? इसका जवाब कोई नहीं ढूंढना चाहता। दिल और दुनिया के बीच हर इंसान कहीं न कहीं फंसा हुआ है। मौत आपको आकर चूम लेती और हम दिल और दुनिया के बीच में फंसे रहते हैं। बहुत से लोगों को इसका अहसास तक नहीं होता है कि वो क्या करना चाहते थे और क्या कर रहे हैं। बचपन से लेकर जवानी की शुरूअात तक हर कोई एक सपना देखता है। लेकिन पूरी दुनिया आपके इस सपने के साथ खेलती है और ए‍क दिन हम सब दुनिया के बहाव में बहने लगते हैं। जिस दुनिया में हम अपने हिसाब से जीना चाहते हैं, वहां दुनिया के हिसाब से जीने लगते हैं। यह समाज, यह दुनिया आपके अंदर के उस शख्स को मारने के लिए जी जान से लगी रहती है। बहुत कम लोग होते हैं जो अपने हिसाब से, अपनी खुशी के लिए जीते हैं। हर कोई कहीं न कहीं दिल और दुनिया के बीच में फंसा हुआ है। मैं भी फंसा हुअा हूं और आप भी।