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एक बार फिर से न्‍याय की जीत हुई

अंतत डॉक्‍टर हनीफ को छोड़ दिया गया। इसी के साथ एक बार फिर से न्‍याय की जीत हुई। लेकिन यह तमाशा है उन लोगों के लिए जो किसी एक विशेष धर्म और जाति को लेकर देश दुनिया में जहर फैलाते हैं। अक्‍सर जब भी आंत‍कवाद और आंतकवादियों की बात होती है तो सबसे पहले नाम इस्‍लाम और मुसलमानों का लिया जाता है। कहा जाता है कि हर आंतकवादी मुसलमान होता है। लेकिन इन नासमझों को कौन बताए कि आंतकवाद को किसी भी धर्म से जोड़कर नहीं देखा जा सकता है। यदि ऐसा किया गया तो प्रवीण्‍ा भाई तोगडिया की विहिप से लेकर मोदी की भाजपा तक आंतकवाद का एक उदाहरण होंगी। क्‍या हम बाबरी मस्जिद और गुजरात नरसंहार 2002 को भूला दें। जहां मुसलमानों के साथ हिन्‍दूओं का भी कत्‍लेआम हुआ था। भारत के पूर्वी हिस्‍से से लेकर दक्षिण तक जो चल रहा है उसमें मुसलमान तो नहीं हैं। क्‍या हम लिटटे को भूल गए हैं। क्‍या हम उल्‍फा को भूल गए हैं। भारत की इं‍दिरा गांधी और राजीव गांधी को मारने वाले मुसलमान नहीं थे। गांधी बाबा की हत्‍या को हम कैसे भूल सकते है। इसमें कहीं भी इस्‍लाम और मुसलमान नहीं थे।

इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि हनीफ को आस्‍ट्रेलिया पुलिस ने बिना कोई पुख्‍ता सबूत के इस लिए पकड़ा क्‍योंकि उनका नाम मोहम्‍मद हनीफ है। यदि वो अमित या जार्ज मैथ्‍यू होते तो शायद यह गलती नहीं की जाती।

Comments

Anonymous said…
Dear Ashish jee,

Greetings for peace,

kafi acha post hai..badqismati se mujhe hindi typing nahin aati.. I alway say to Brahmins that they should focus on the monotheistic communications and stop having problem with Muslims who just follow the pure monotheistic commands communicated through messengers

Dr.Muhammad Mukhtar Alam

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