Skip to main content

दूरियों से प्यार

लोग कहते हैं कि दूरियों से प्यार बढ़ता है। कुछ वक्त पहले तक यही हम भी मानते थे। लेकिन धारणा अब टूट रही है। जब वे छोड़कर जा रही थीं तो लगा कि वे हमें हमेषा याद रखेंगे लेकिन ऐसा हो नहीं सका। वजह कुछ भी हो सकती। हो यह भी सकता है कि उसे वक्त ही नहीं मिलता है। यह भी संभव है कि वे अब मुझे याद ही नहीं करना चाहते। कुछ ही दिनों में हम उसके कुछ अधिक करीब आ गए थे। खैर यह तो अब पुरानी बात हो चुकी है। जिसे जाना वे जा चुके हैं। इस शहर में जिंदगी जीने का अलग ही मजा आ रहा है। हरदिन यहां के जीवन तो जिंदादिली से जी रहा हूं। इंदौर शहर के लोग जितने अच्छे हैं उतना ही अच्छा यहां का खाना। चाहे यह दाल बाफले हो या फिर साबुदाने की खिचड़ी। बाकी बात अगली बार।

Comments

Udan Tashtari said…
यह तो बहुत बढ़िया है कि आप एन्जाय कर रहे हैं इन्दौर!! छ्प्पन भोग और राजवाड़े के अलग दिन थे हमारे भी!
अच्छा जी मौजा ही मौजा हो रही हैं। लगे रहो। जमे रहो।
Achcha hai ki aap bhi bewafa ko bhool kar apni jindagi badhiya se jee rahe hain.
दुसरे के मन की बात जानना बहुत मुस्किल हे, हर किसी की बहुत सी अपनी प्रेशानिया होती हे, भुल जाओ ओर फ़िर से नई जिन्दगी शुरु करो .. धन्यवाद ओर अब मोजा ही मोजा करो
PD said…
वैसे ये तो सही कहा...
आमतौर पर यही होता है..
Out of sight..
Out of mind..
seema gupta said…
Jindgee jine kaa hee naam hai, hr maussam mey dukh or sukh mey chulte hee rehna hain. thanks for sharing your experience with us.

Regards
शोभा said…
बहुत सुन्दर ऐसा ही होता है। जीवन चलने का नाम है। चलते रहिए।

Popular posts from this blog

#DigitalGyan : Sarahah के बारे में जानिए सबकुछ

'सराहा' दुनियाभर में तहलका मचाने के बाद अब हिंदुस्तान में छा गया है। जिसे देखिए, वो इसका दीवाना बन चुका है। सऊदी अरब में बनाए गए एप सराहा को दुनियाभर में यूजर्स काफी पसंद कर रहे हैं । करीब एक महीने पहले लॉन्च हुए इस एप को 50 लाख से ज्यादा बार डाउनलोड किया गया है। खास बात यह है कि एप बनाने वाली इस स्टार्टअप को सिर्फ तीन लोग चलाते हैं। इनमें 29 साल के जेन अल-अबीदीन तौफीक और उनके दो दोस्त शामिल हैं।  इस एप के जरिये यूजर अपनी प्रोफाइल से जुड़े किसी भी व्यक्ति को मैसेज भेज सकते हैं। लेकिन सबसे मजेदार यह है कि मैसेज पाने वाले को यह पता नहीं चलेगा कि ये मैसेज किसके पास से आया है। जाहिर है, इसका जवाब भी नहीं दिया जा सकता। और यही कारण है कि ये ऐप लोगों के बीच बहुत तेज़ी से लोकप्रिय होता जा रहा है। सराहा एक अरबी शब्द है, जिसका मतलब ‘ईमानदारी’ होता है। तौफिक ने बताया ‘एप बनाने का मकसद यह है कि इसके जरिये कोई कर्मचारी, बॉस या वरिष्ठ को बिना झिझक अपनी राय दे सके। यूजर किसी व्यक्ति से वो सब कह सकें जो उनके सामने आकर नहीं कह सकते। ऐसा हो सकता है कि वे जो कह रहे हैं उसे सुनना उन्हें अच्छा न ल…

दोस्ती और विश्वासघात में अन्तर होता है

दोस्ती और विश्वासघात में अन्तर होता है
यह तो सब जानते हैं
मैं भी और आप भी
लेकिन इसे क्या कहेंगे आप
जब आपका सबसे प्यारा दोस्त
आपके साथ वो करे
जो दुश्मन भी नहीं करता है
जी हाँ मैं अपने सबसे प्यारे दोस्त की बात कर रहा हूँ
मैंने उसकी दोस्ती को इबारत समझा
और उसने हर मोड़ पर मुझे ठगा
मैं आज भी उसपर विश्वास करना चाहता हूँ
लेकिन करूँ या नहीं करूँ
अजीब सी उलझन है

बाघों की मौत के लिए फिर मोदी होंगे जिम्मेदार?

आशीष महर्षि 
सतपुड़ा से लेकर रणथंभौर के जंगलों से बुरी खबर आ रही है। आखिर जिस बात का डर था, वही हुआ। इतिहास में पहली बार मानसून में भी बाघों के घरों में इंसान टूरिस्ट के रुप में दखल देंगे। ये सब सिर्फ ज्यादा से ज्यादा पैसे कमाने के लिए सरकारें कर रही हैं। मप्र से लेकर राजस्थान तक की भाजपा सरकार जंगलों से ज्यादा से ज्यादा कमाई करना चाहती है। इन्हें न तो जंगलों की चिंता है और न ही बाघ की। खबर है कि रणथंभौर के नेशनल पार्क को अब साल भर के लिए खोल दिया जाएगा। इसी तरह सतपुड़ा के जंगलों में स्थित मड़ई में मानसून में भी बफर जोन में टूरिस्ट जा सकेंगे। 
जब राजस्थान के ही सरिस्का से बाघों के पूरी तरह गायब होने की खबर आई थी तो तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सरिस्का पहुंच गए थे। लेकिन क्या आपको याद है कि देश के वजीरेआजम मोदी या राजस्थान की मुखिया वसुंधरा या फिर मप्र के सीएम शिवराज ने कभी भी बाघों के लिए दो शब्द भी बोला हो? लेकिन उनकी सरकारें लगातार एक के बाद एक ऐसे फैसले करती जा रही हैं, जिससे बाघों के अस्तिव के सामने खतरा मंडरा रहा है। चूंकि सरकारें आंकड़ों की बाजीगरी में उस्ताद होती हैं, तो ह…