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इंदौर को मेरा पहला सलाम

मुंबई से भोपाल और अब इंदौर में अपना डेरा जम गया है। अब देखने वाली बात यह है की मालवा की जमीं से मुझे कितना प्यार मिलता है। आज पहला दिन शानदार रहा। मैंने पहले ही दिन इस शहर को अपना मान लिया है और शायद यहाँ के रहवाशी भी मुझे अपना मानकर बेपनाह मोहब्बत दें। इंदौर के सभी ब्लोगेर्स से मेरा विन्रम अनुरोध है कि मुझे भी अपनी जमात में शामिल कर लें। आज सुबह जैसे ही यहाँ की सरजमीं पर कदम रखा तो पानी की बूंदों ने कहा कि बिना नहाये यहाँ किसी को प्रवेश नही है सो मुझे भीगना ही था। और यही कारण रहा की मैं पूरी तरह अभी भी फ्रेश महसूस कर रहा हूँ। जबकि वक्त बहुत अधिक हो गया है।

Comments

Anonymous said…
ye chidiya ki beet barabar kya post daal kar blog lekhak bante ho...kuch racho...
Udan Tashtari said…
अच्छा लगेगा-बहुत शुभकामनाऐं. इन्दौर तो बहुत बढ़िया शहर है.
आप को बहुत प्यार मिलेगा और चुनौतियाँ भी।
ALOK PURANIK said…
इंदौर में कहां पहुंच गये प्यारे।
शुभकामनाऐ। आशीष जी अच्छा ही लगेगा। और हाँ शायद मालवा के तो प्रभाष जोशी जी भी है।
Raviratlami said…
ग्रेट. अब आपकी बाई लाइन्स यहां रतलाम में भी पढ़ने को मिलेंगी. और हम तो आपको रतलाम के चिट्ठाकारों (मालवी) में भी शामिल मानते हैं.

>> लोगबाग मुझसे पूछते रहते हैं - पीईटी काउंसिलिंग का समय है - कौन सा विषय और कौन सा कॉलेज अच्छा है - भोपाल-इंदौर में. कोई स्टोरी इस पर कीजिए या किसी से करवाइए.
अच्छा लगेगा-बहुत शुभकामनाऐं. इन्दौर तो बहुत बढ़िया शहर है.

अच्छा लगेगा. मैं भी एक दो बार घुमा हूँ.
आकाश के नमकीन जरुर खईयेगा. वो भी लौंग वाले भुजिया.
aapka swagat hai...
Anonymous said…
iss pyare sheher men aapka






SWAGAT HAI JI.............!!"



AWDHESH PRATAP SINGH
# 98274 33575, INDORE

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Ashish Maharishi
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