4 February 2009

क्या एनजीओ वाली लड़कियां बड़ी चालाक होती हैं?

बेटा ये एनजीओ वाली लड़किया बड़ी चालाक होती हैं। जरा बच कर रहना है। यह चेतावनी मुझे पिछले दिनों मिली है। चेतावनी देने वाली हमारी नई मकान मालकिन हैं। भोपाल के शाहपुरा का यह घर है फिलहाल पर है। एंडवास किराया लेने के बाद हमारी मकान मालिक ने जब मुझे चेताते हुए एनजीओ वाली चेतावनी दी थी तो मुझे मुस्कुराना पड़ा। इसकी भी वजह थी। वजह यह थी कि राजस्थान में कई साल जन आंदोलन को देने के साथ मैने एनजीओ को बड़े करीब से देखा है। एनजीओ वाली लड़किया चालाक नहीं बल्कि अपने अधिकारों को लेकर जागरुक रहती हैं। बस यही बात मकान मालिकन को अटक रही है। खैर आशंका है कि कुछ दिनों बाद एनजीओ वाली लड़कियों को मकान छोड़ना पड़ सकता है। क्योंकि वे बहुत चालाक होती हैं।


मसक कली मटक कली

बॉलीवुड में प्रयोग तो आए दिन होते रहते हैं। लेकिन इन दिनों जो प्रयोग हो रहे हैं वे वाकई शानदार हैं। जरा दिल्ली -६ फिल्म को ही देख लिजीए। फिल्म के सभी गाने दिल को छुने वाले हैं। इस फिल्म का अधिकांश हिस्सा जयपुर के पास सांभर कस्बे में फिल्माया गया है। निर्देशक से लेकर पूरी टीम तक ने सांभर को चांदनी चौक में तब्दील करने में कोई कमी नहीं रखी है। खैर फिल्म में एक गाना है मसाक कली मटक कली। शानदार गाना है। जबकि टीवी पर देखता हूं और सुनता हूं तो सभी काम छोड़ना पड़ता है। सोनम का कबूतर वाकई मसाक कली है। फिल्म में अभिषेक और सोनम के साथ कई दिग्गज कलाकार मौजूद हैं।

ओबामा से पामेला तक

इन दिनों भोपाल में हूं। इंदौर से ट्रांसफर के बाद भास्कर डॉट कॉम में मेरी सेवाएं ली जा रही हैं। वेब में काम करने का सबसे बड़ा फायदा जो मुझे नजर आ रहा है, वह यह है कि आपकी नजर दुनिया भर की हलचलों पर रहती है। मसलन ओबामा साहेब क्या कर रहे हैं? पामेला और ब्रिटनी के क्या जलवा हैं। साथ में दिल्ली से लेकर बैतुल तक में क्या चल रहा है। मैं तो अपनी इस नई जिम्मेदारियों का मजा उठा रहा हूं। आप बताएं आप क्या कर रहे हैं।

10 comments:

Kishore Choudhary said...

आशीष, हम तो कुछ दे नही रहे बस ओबामा से पामेला तक आपको पढ़ रहे है।

सुशील कुमार छौक्कर said...

आशीष जी हम भी आपकी आँखो से मजा लूट रहे है। आपकी पोस्ट देखती है तो दोडे चले आते है।

डॉ .अनुराग said...

सुनी सुनाई सारी बातें सच नही होती..डेल्ही-६ के दो ओर गीत खास है .तू है....उनमे से खास ......देव डी का एक गाना परदेसी भी सुनिए अपने स्टाइल का खास है

poemsnpuja said...

जिन्हें अपने हक का अंदाजा हो और उसे लेने में न कतराएं ऐसे लोगो से सभी को डर लगता है, इनके लिए कई विशेषण भी इजाद किए गए हैं...कुछ इसलिए ही कहा होगा आपकी मकान मालकिन ने.

poemsnpuja said...
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bhawna said...

aap aapki makaan malkin ko unke bete/bhaai sarikhe lage honge isliye unhone aisa kaha hoga ya shayad unka koi anubhav raha ho , aap sirf muskarae ye aapne sahi kiya .

विनीत कुमार said...

ये अपने समाज का सच है कि अपने अधिकारों के लिए लड़ने और जागरुक रहनेवाली स्त्रियां यहां पसंद नहीं की जाती।

राजीव जैन Rajeev Jain said...

bas bhai naukri
aur kaya

TU bata shadi kab kar raha hai

Dileepraaj Nagpal said...

Aapne Makaan Malkin ki baat ki to mujhe bhi pichle dino hua ek vakya yaad aa aya. use likhkar blog per add karta hun. shukriya aapka

samuela said...

Bahut achchhha likhte hain aap,Bhopal me mai bhi reh chuki hun,Blog padh k wahan ki yaad aagai.

Apka blog pehli baar visit kiya he & i hope i ll visit it again to read ur next post.