भाई साहब जिंदगी में कुछ भी आसानी नहीं मिलता।
पता है, तो इसमें बताने की क्या बात है?
नहीं, मुझे लगा आपको पता नहीं होगा।
क्यों अपने आपको बहुत होशियार समझते हो?
अरे भाई साहब आप तो नाराज हो गए।
अरे यार नाराज होने की बात ही है। खैर कैसे आना हुआ?
कुछ नहीं, बस इधर से गुजर रहा था तो कदम आपके घर की ओर मुड़ गए। अच्छा आपको कुछ पता चला?
क्या..
आपको नहीं पता?
अरे नहीं यार..क्या हुआ?
भाई साहब पाखी की शादी हो गई।
क्या.....कब ?
इसमें बाद कमरे में काफी देर तक शांति हो गई। जैसे घर में मातम हो और किसी की मौत हो गई है। जवाब आज तक नहीं मिला।
9 comments:
who is pakhi mr ashish
पहले तो ये बतायें की ये पाखी कौन है ?
पाखी वही जिस के पंख लगे हों और उड़ने को आजाद हो।
इसका क्या जबाब मिलेगा..क्या जबाब बनता है?
हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ.
कृप्या अपने किसी मित्र या परिवार के सदस्य का एक नया हिन्दी चिट्ठा शुरू करवा कर इस दिवस विशेष पर हिन्दी के प्रचार एवं प्रसार का संकल्प लिजिये.
जय हिन्दी!
ashish ji, pakhi k pankh the vo ud gai uska kya matm mnana.....
भाई साहब ये तो काफी पुरानी खबर हो गई है। आपको अब पता चला है क्या। लेकिन हमारी संवेदनाएं आपके साथ हैं। भगवान से दुआ है कि आगे आपके साथ ऐसा न हो। बाई द वे ये पाखी है कौन
Yeh Pakhi mere man ki ek kalpna hai...yh kahin nhi hai...bus mere jehan me hai
har fikr ko dhue me udata chala gaya
mai jindgi ka sath nibhata chala gaya....
apko shubhkamnaye.
are bhai sahab ye khabar to june july ki hai... waise ye wohi pakhi hai ya koi aur....
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