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कुछ वक्त पहले मैं ऐसा नहीं था

कुछ वक्त पहले मैं ऐसा नहीं था
आज भी मैं वैसा नहीं हूं

मै कैसा हूं, क्यूं हूं, मुझे खुद भी नहीं पता
मै कौन हूं और क्यों हूं

तुम्हे तो पता था लेकिन तुमने बताया क्यों नहीं ?
अच्छा हुआ नहीं बताया
यदि तुम बताती तो शायद मुझे तकलीफ होती

लेकिन क्यों नहीं बताया?
यदि बता देती तो शायद मै ऐसा नहीं होता
जैसा मैं हूं, फिर भी मैं हूं

Comments

Anonymous said…
bahut umada
Mithilesh dubey said…
बहुत खुब। सुन्दर रचना के लिए बधाई।
आपका हिन्दी में लिखने का प्रयास आने वाली पीढ़ी के लिए अनुकरणीय उदाहरण है. आपके इस प्रयास के लिए आप साधुवाद के हकदार हैं.
Udan Tashtari said…
सही है..हो भी ठीक ठाक.. :)

भावपूर्ण रचना!
मै मैं ही होता है .. तुम नहीं बन सकता .. सदर अभिव्‍यक्ति !!
RAJESH said…
बहुत खूब...उम्दा प्रयास , इन शब्दों में कुछ ऐसा है जो जिंदगी के कैनवस के एक खास पन्ने की तरफ सकेंत करता है दोस्त

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