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तू जब से गया है मुझे छोड़कर

तू जब से गया है मुझे छोड़कर
मैं ऐसा तन्हा हुआ
कि अब तो लगता है जीना भी क्या जीना है
लेकिन फिर भी जीना होगा
वादा जो तुझसे किया है, निभाना होगा
मौत को आगोश में लेकर तुझे भूलना चाहता हूं
पर कम्बख्त मौत भी बेवफा निकली
जिंदगी ने थामा दामन
पर मौत भी दरवाजे पर खड़ी है
अब फैसला तुझे करना है
मौत और जिंदगी के दरम्यिान

Comments

Mithilesh dubey said…
बहुत खुब। लाजवाब रचना के लिए बहुत-बहुत बधाई.........
जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाएं....!

--
शुभेच्छु

प्रबल प्रताप सिंह
कानपुर - 208005
उत्तर प्रदेश, भारत

मो. नं. - + 91 9451020135

ईमेल-
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