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UP POLL 2017 : 'दादा' आप जैसों की अब भाजपा में कोई जरूरत नहीं...

राजनीति में बहुत कम ऐसे नेता हैं, जिनका सम्मान करने का मन करता है। खासतौर से भाजपा की बात की जाए तो सम्मानित नेताओं की संख्या ना के बराबर ही होती है। पर भाजपा जैसी सांप्रदायिक पार्टी में भी श्यामदेव राय चौधरी 'दादा' जैसे नेता हैं, जो अपने काम के बल पर बनारस की जनता के दिलों पर राज करते हैं। लेकिन श्यामदेव राय चौधरी 'दादा' का टिकट काटकर भाजपा ने साबित कर दिया है कि अब पार्टी में अच्छे नेताओं की कोई आवश्यकता नहीं है। इसी के साथ भाजपा ने बनारस में अपनी हार भी तय कर ली है। 

वाराणसी के सबसे सक्रिय और अपराजेय भाजपा नेता श्यामदेव राय चौधरी 'दादा' पिछले सात बार से लगातार वाराणसी दक्षिण से चुनकर विधानसभा पहुंचते रहे हैं। लेकिन संघ और संगठन ने उनके समर्पण और ईमानदारी की अनदेखी करते हुए नीलकंठ तिवारी को टिकट दे दिया, जिन्हें क्षेत्र की जनता जानती तक नहीं है। श्यामदेव राय चौधरी 'दादा' बातचीत में कहते हैं कि यदि पार्टी टिकट काटने से पहले मुझे बता देती तो मैं किसी बीमारी का बहाना बनाकर खुद पीछे हट जाता। पार्टी को कम से कम मेरी कमियां तो बता ही देनी चाहिए थी। 

राजनीतिक जीवन में सादगी और शुचिता का पर्याय रहे श्यामदेव राय चौधरी 'दादा' बनारस में भाजपा की पहचान माने जाते हैं। उन्होंने बतौर पार्षद अपने इलाके के लोगों की सेवा करनी शुरू की थी, जो आज तक जारी है। दशाश्वमेध थाने के पास कोदई चौकी के सामान्य-से मकान में आज भी वे साधारण ढंग से ही रहते हैं। सड़कों से लेकर गलियों तक में पैदल चलते या रिक्शे पर बैठ कर जाते हुए दादा को देखा जा सकता है। दादा का पूरा जीवन सादगी से भरा रहा है। अब कौन विधानसभा में खांटी बनारसी में बनारस की समस्या उठाएगा। बनारस और खांटी बनारसीपन का बिंदास पर्याय श्यामदेव राय चौधरी 'दादा' का टिकट कटने से साबित हो गया है कि राजनीति में बेदाग जीवन और हमेशा जनता के बीच रहना ही पर्याप्त नहीं है।

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