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उनकी तलाश जारी है

वे खुश हैं। वजह क्या हो सकती है। क्योंकि वे जिससे नफरत करती हैं वह इनसे बहुत दूर कहीं बैठा हुआ है और वे अपनों के साथ खुष हैं और जिंदगी का भरपूर मजा उठा रही हैं। सुना है आजकल राजस्थान के किसी शहर में हैं। किस शहर में हैं यह नहीं पता। लेकिन फिर भी वह उसकी उस खुषबू को आज भी महसूस कर सकता है जब वे उसके साथ थी। उसके होंठो के तिल को वह आज चूमना चाहता है। दम तोड़ती हसरतों के बावजूद वह आज भी उसे पाना चाहता है। उनकी तलाश में वह पूरी दुनिया भटक रहा है पर वे नहीं मिल पा रही हैं। वे कोई भी हो सकती हैं। वे उप्र के कस्बानुमा शहर की कोई गोरी या फिर मुंबई की कोई हसीना भी हो सकती हैं। कोई भी। जब भी उनकी याद आती है वे उसे याद करके जिंदगी के एक दिन और काट लेता है। यही चल रहा है। कब तक चलेगा पता नहीं।

Comments

जबतक भी चले , खुश है , तो चिंता क्या करनी।
जबतक भी चले , खुश है , तो चिंता क्या करनी।
दयार-ए-दिल की रात में चराग़ सा जला गया
मिला नहीं तो क्या हुआ वो शक्ल तो दिखा गया
Shastri said…
"कब तक चलेगा पता नहीं।"

अनुमान लगाना मुश्किल है !!!



-- शास्त्री जे सी फिलिप

-- हिन्दी चिट्ठाकारी के विकास के लिये जरूरी है कि हम सब अपनी टिप्पणियों से एक दूसरे को प्रोत्साहित करें
Udan Tashtari said…
ऐसे ही चलता रहता है-सतत प्रक्रिया है.
jab tak ki talash khatam na ho
Deepak said…
खुल के दिल से मिलो तो सजा देते हैं लोग,

सच्चे जज्बात भी ठुकरा देते हैं लोग,

क्या देखेंगे दो इंसानों का मिलना,

बैठे हुए दो परिंदों को तो उदा देते हैं लोग...

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