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लघु कथा : आंसू

दोनों बहुत खुश थे। हर दिन तो भरपूर जीते थे। दुनिया से बेगाने थे फिर भी खुश थे। शादी हुई। हनीमून के दोनों घूमने के लिए जयपुर पहुंचे। एक मॉल में..सामने से आते एक युवक को देखकर प्रेमिका ने पहले इगनोर करने की कोशिश थी लेकिन वह जब सामने आ गया तो उसे नजर मिलानी पड़ी। युवक ने पूछा : कैसी हो तुम? मैं बहुत अच्छी हूं। उसने थोड़ा संकोच से जवाब दिया। गुड। रहना भी चाहिए। युवक ने ठहरे हुए शब्दों में कहा। इतने में इस लड़की का पति चॉकलेट फ्लेवर्ड आइसक्रीम लेकर पहुंचता है। लड़की अपने पति से उस युवक का परिचय कराती है। लड़की ने कहा, भोपाल में एक ही ऑफिस में जॉब करते थे। आजकल ये यहीं शिफ्ट हो गए हैं। पति ने मुस्कुराते हुए युवक से हाथ मिलाते हुए हैलो कहा।उधर से भी इतनी गर्मजोशी से हाथ मिले। कुछ मिनट की बात के बाद युवक बाहर निकल गया और वे दोनों शॉपिंग करने में व्यस्त हो गए। लेकिन इस लड़की और उस युवक की आंखें हल्की गीली हो चुकी थीं। इतनी गीली कि लड़की ने तय किया कि वह कभी जयपुर नहीं आएगी। और उस युवक का क्या हुआ..लड़की को कभी पता नहीं चला....

नादान परिंदे घर आ जा..घर आ जा..घर आ जा..

रॉकस्टार फिल्म देखने के बाद आपका भी दिल कुछ यूं ही गुनगुनाने लगे तो इसे रोकिए मत। गुनगुनाने दीजिएगा बरसों बाद। नादान परिंदे घर आ जा..घर आ जा..घर आ जा..। लेकिन कुछ परिंदे जब एक बार उड़ जाते हैं तो कभी नहीं आते। वे कहीं और अपना बसेरा बना लेते हैं। या कहें कि मजबूरी होती है एक अदद आशियाने की। कभी परिंदे इस लिए उड़ जाते हैं, क्योंकि जिंदगी की जंग में हार जाते हैं। वक्त की मार से डर जाते हैं। या फिर किस्मत उन्हें किसी और जगह ले जाती है। कुछ ऐसा ही जार्डन और हीर के संग भी होता है। दोनों रॉकस्टॉर फिल्म के मुख्य बिंदु हैं। जार्डन और हीर ही क्यों, ऐसा तो हर उस शख्स के साथ होता है जो अपनी पाक मोहब्बत से बिछड़ जाते हैं। वैसे अनगिनत जार्डन और हीर हमारे आसपास भी मौजूद हैं। बस हम उन्हें पहचान नहीं पाते हैं। खैर इस फिल्म में जिस तरह से शहरी युवा को दिखाया गया है, वह बहस के जाल में उलझ सकता है। क्या आज के शहरी युवा को इस बात से कोई फक्र्र नहीं पड़ता है कि उसका प्यार शादीशुदा है? वह अपनी दिल की बात जुबान तक लाने में उसके सामने कोई बंधन नहीं आता है। महिलाओं ने क्या अपने जिस्म से इतनी आजादी पा ली हैं कि ...

फेसबुक कहानी-1

हर दिन की तरह उस दिन भी मैं सामान्यतौर पर ऑफिस पहुंचा। कम्प्यूटर ऑन किया और अपने काम में मशगूल हो गया। सबकुछ सामान्य था और की नजर में। ऑफिस में काम करने वाले मेरी तरह अन्य सहकर्मियों की तरह। लेकिन घर से ऑफिस तक के दस मिनट के सफर में बहुत कुछ बदल गया था। जिस गलियों को पार कर के मैं ऑफिस तक का सफर तय करता था, आज वहां सन्नाटा ही सन्नाटा था। खिड़कियां बंद थीं। लेकिन उस घर के सामने भीड़ जमा था। अगरबत्ती की हल्की-हल्की सुगंध मेरे नखुनों से होती हुई मेरी सांसों में धुल गई थी। भीड़ में मौजूद हर चेहरा लटका हुआ था। जो खिड़की हमेशा खुली रहती थी। आज बंद थी। खामोशी। मातम। सन्नाटा। ऑफिस के लिए लेट हो रहा था। मेरे कदम और तेज हो गए। कदमों के तेज होने के साथ ही दिल की धड़कन भी दौड़ रही थी। नहीं, भाग रही थी। कई गलियों को पार कर मेन रोड पर आकर बाएं मुड़ा तो सामने ऑफिस की भव्य बिल्डिंग दिखी। मेरे कदम तेजी से दफ्तर में घुस गए। बाहर सबकुछ सामान्य था..लेकिन अंदर...

कविता

मैं फिर से जीने लगा हूँ क्यूंकि फिर से कविता लिखने लगा हूं.. मैं उसे गुनगुनाता हूं अकेले पड़ने पर जोर जोर से अपनी ही लिखी एक एक लाइनों को चिलाता हूं.. मैं फिर से कविता लिखने लगा हूं.. मेरी कविताओं में केवल और केवल तुम हो लेकिन तुम कौन! हाँ याद आया तुम मतलब मैं क्यूंकि मुझसे ही तुम हो और तुमसे मैं तुम मुझसे दूर जा सकती हो लेकिन खुद से कैसे? क्यूंकि तुम्हारे एक एक अहसास में मैं ही मैं हूं

पाश की कविताएं

सभी कविताएं मशहूर कवि पाश की हैं। उनका जन्म 9 सितंबर 1950 को पंजाब के तलवंडी सलेम, तहसील नकोदर, जिला जालंधर में हुआ था। 23 मार्च 1988 को अमेरिका लौटने से दो दिन पहले तलवंडी सलेम में अभिन्न मित्र हंसराज के साथ खालिस्तानी आतंकवादियों की गोलियों के शिकार होकर शहीद हुए। 1- बस कुछ पल और तेरे चेहरे की याद में बाकी तो सारी उम्र अपने ही नक्श खोजने से फुरसत न मिलेगी बस कुछ पल और यह सितारों का गीत फिर तो आसमान की चुप सबकुछ निगल जाएगी....। देख, कुछ पल और चांद की चांदनी में चमकती यह तीतरपंखी बदली शायद मरुस्थल ही बन जाए ये सोए हुए मकान शायद अचानक उठकर जंगल की ओर ही चल पड़ें.... 2- उनकी आदत है सागर से मोती चुग लाने की उनका रोज का काम है, सितारों का दिल पढ़ना। 3- हजारों लोग हैं जिनके पास रोटी है चांदनी रातें हैं, लड़कियां हैं और 'अक्ल' है हजारों लोग हैं, जिनकी जेब में हर वक्त कलम रहती है और हम हैं कि कविता लिखते हैं... 4- मेरे पास चेहरा संबोधक कोई नहीं धरती का पागल इश्क शायद मेरा है और तभी जान पड़ता है मैं हर चीज पर हवा की तरह सरसराता हुआ गु...

एक अधूरा प्रेम पत्र

उसने एक बार फिर से कोशिश की कि वह आपस आ जाए। उसने अपना लैपटॉप ऑन किया और कुछ लिखने लगा। वह क्या लिख रहा है, उसे भी नहीं पता। शुरूआत कुछ यूं की.. प्रिय गीत, तुम जा चुकी थी। तुम चली गई आखिरकार। कितनी कोशिश की थी तुम्हें रोकने की मैंने। सबकुछ बेकार रहा। तुम नहीं रूकी। तुमने तय कर लिया कि अब जो भी हो जाए, मेरे जैसे शख्स के साथ कोई संबंध नहीं रखोगी। तुम लगातार मुझसे दूर होती जा रही थी। और मैं सिर्फ देखता ही रह गया। जिस शहर में हम पहली बार मिले थे, उसी शहर में हम जुदा भी हुए। शुरूआत के कुछ महीने तुम कितना दुखी थी। ऑफिस हो, मुंबई हो या फिर खुद का घर, हर जगह तुम्हारे जाने के बाद की उदासी छाई हुई थी। तुम जा चुकी थी। मैं तो बहुत पहले ही जा चुका था। बाद में लौटकर भी आया मैं। लेकिन तुम नहीं लौट पाई। नहीं चाहते हुए भी मुझे एक फैसला लेना पड़ा। हर बार कि तरह इस बार भी मैंने ही फैसला लिया। इस बार तो तुम्हें इसके बारे में बताया भी नहीं। लेकिन मेरी जिंदगी में आने का और मुझे अपनी जिंदगी में लेना का फैसला तुमने ही किया था। मैं तुम्हारा पहला प्यार था। ऐसा तुमने बताया था लेकिन फिर भी तुम वापस नहीं आ पाई। तु...

सबसे खतरनाक होता है आस्तीन का सांप 1

सबसे खतरनाक होता है आस्तीन का सांप अब तक यही सुना होगा आपने गलत। बिल्कुल गलत। आस्तीन के सांप से ज्यादा खतरनाक होता है आस्तीन का इंसान वह कोई भी हो सकता है बस सांप नहीं हो सकता वह इंसान के भेष में कोई भी हो सकता है वह आपका सबसे अच्छा दोस्त, साथी भी हो सकता वह अपकी जान पर नजर रखता है वह आपको धोखा दे सकता है वह आपकी ऐसी-तैसी करने में हमेशा तत्पर रहता है क्योंकि वह आस्तीन का इंसान है वह किसी भी जाति का हो सकता है किसी भी धर्म का हो सकता है आस्तीन का इंसान होना ही उसकी सबसे बड़ी जाति है, धर्म है