Skip to main content

Posts

तेरे जाने के बाद ...

तेरे जाने के बाद कई रोज़ तक बहते रहे थे मेरे आंसू और कविता फिर एक दिन मैं रोया लेकिन आंसू नहीं आये और आज कविता भी कागज़ पर नहीं उतरी - हिमांशु बाजपेयी

रणवीर, डीनर और मैं

पिछले कुछ दिनों मैने जमकर मस्ती की। अब आप पूछेंगे कि क्या किया भाईसाहब। तो सुनिए। एक सुबह कपूर खानदान के वारिस रणवीर कपूर से मुलाकात की तो उसी शाम भोपाल के विंड एंड वेव्स में शानदार डिनर। अब आगे क्या कहूं। तस्वीरें देखकर आप खुद ही अंदाजा लगा लीजिए। जय जय

तू जब से गया है मुझे छोड़कर

तू जब से गया है मुझे छोड़कर मैं ऐसा तन्हा हुआ कि अब तो लगता है जीना भी क्या जीना है लेकिन फिर भी जीना होगा वादा जो तुझसे किया है, निभाना होगा मौत को आगोश में लेकर तुझे भूलना चाहता हूं पर कम्बख्त मौत भी बेवफा निकली जिंदगी ने थामा दामन पर मौत भी दरवाजे पर खड़ी है अब फैसला तुझे करना है मौत और जिंदगी के दरम्यिान

कुछ वक्त पहले मैं ऐसा नहीं था

कुछ वक्त पहले मैं ऐसा नहीं था आज भी मैं वैसा नहीं हूं मै कैसा हूं, क्यूं हूं, मुझे खुद भी नहीं पता मै कौन हूं और क्यों हूं तुम्हे तो पता था लेकिन तुमने बताया क्यों नहीं ? अच्छा हुआ नहीं बताया यदि तुम बताती तो शायद मुझे तकलीफ होती लेकिन क्यों नहीं बताया? यदि बता देती तो शायद मै ऐसा नहीं होता जैसा मैं हूं, फिर भी मैं हूं

भाई साहब उसकी शादी हो गई

भाई साहब जिंदगी में कुछ भी आसानी नहीं मिलता। पता है, तो इसमें बताने की क्या बात है? नहीं, मुझे लगा आपको पता नहीं होगा। क्यों अपने आपको बहुत होशियार समझते हो? अरे भाई साहब आप तो नाराज हो गए। अरे यार नाराज होने की बात ही है। खैर कैसे आना हुआ? कुछ नहीं, बस इधर से गुजर रहा था तो कदम आपके घर की ओर मुड़ गए। अच्छा आपको कुछ पता चला? क्या.. आपको नहीं पता? अरे नहीं यार..क्या हुआ? भाई साहब पाखी की शादी हो गई। क्या.....कब ? इसमें बाद कमरे में काफी देर तक शांति हो गई। जैसे घर में मातम हो और किसी की मौत हो गई है। जवाब आज तक नहीं मिला।

राजमाता गायत्री देवी से वह पहली और अंतिम मुलाकात

पिछले कुछ समय से देश-विदेश की मीडिया में जयपुर की पूर्व राजमाता सुर्खियों में बनी हुई हैं। उनकी खासियत कम उनसे जुड़े विवादों को लेकर वे अधिक चर्चा में हैं। अब सबकी नजर उनकी एक हजार करोड़ रूपए की वसीयत पर है। फिलहाल यह वसीयत किस किस को मिलेगी, कहना आसान नहीं है। लेकिन आज बात उनकी वसीयत की नहीं। वो भले ही लोगों के लिए पूर्व राजमाता रही हों लेकिन मुझ जैसे लोगों के लिए वो हमेशा न सिर्फ जयपुर की राजमाता रहीं, बल्कि कहीं न कहीं वो मुझे खुद की राजमाता लगती थीं। जयपुर में जिन लोगों ने कुछ साल भी गुजारे हैं, वे इस बात को अच्छी तरह समझ सकते हैं। गायत्री देवी और जयपुर को एक दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता है। राजमाता से मेरी पहली और आखिरी मुलाकात आज से करीब छह साल पहले हुई थी। उस वक्त मैं बीकॉम फाइनल की पढ़ाई खत्म कर जयपुर के एक स्थानीय अखबार के लिए काम करता था। उसी वक्त जयपुर के फेमस होटल रामबाग पैलेस में एक कार्यक्रम के दौरान राजमाता से मुलाकात हुई। अब तक उनके बारे में सिर्फ पढ़ा और सुना ही था। लेकिन जैसे ही उन्हें मैने गलियारे से आते देखा तो मेरी आंखें खुली की खुली रह गईं। यह किसी ख्वाब के सच ह...

क्या करूँ आती है अब अक्सर तुम्हारी याद

कभी खुशबु सी आती है तो महक उठतीं हैं यादें छाजाती है सुनहरी सी वो एक अक्स उभरता है ये दिल मशरूफ रहता है उस लम्हे मैं अभी है वो पास जैसे कह रहा है कुछ ख़ास जो कभी कहा था उसने बस एक एहसास ही है बाकी जो हर रोज रहता है है चेहरे पर मेरे ख़ुशी वही जो तब तुम्हारे चेहरे पर भी थी है हर वो पल भी इस लम्हे जो तब जिया था तुम्हारे साथ क्या करूँ आती है अब अक्सर तुम्हारी याद