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रेगिस्तान और वो : बंजर जमीं इंतजार की- भाग दो

शहर में एक तरफ़ उनकी मोहब्बत परवान चढ़ रही थी तो शहर के दूसरे कोने में जावेद की हत्या हो चुकी थी। जावेद और अमित में ज्यादा अन्तर नहीं था सिर्फ़ धर्मं को छोड़कर. नाम से ही जाहिर हैं वो मुसलमान था. हाँ मुसलमान. तभी तो उसे मार दिया गया जबकि अमित आज भी जिंदा है॥ जबकि दोनों ने एक ही गुनाह किया था. वो था प्यार करने का. वही प्यार जिसे मुसलमानों कुरान शरीफ से लेकर हिन्दुओ के ग्रंथों तक में सबसे ऊपर माना गया था.

जावेद के हत्यारों को पोलिस खोज रही थी जबकि पूरा शहर जानता था कि इस हत्या के पीछे कौन लोग शामिल हैं।

शहर के कम्पनी बाग़ में आज काफी शान्ति नहीं...अजीब सी खामोशी थी। इस खामोशी को परुनिशा की आवाज़ तोड़ती है..

मैं जान सकती हूँ अमित...आखिर तुम्हे हुआ क्या है ?
कुछ नहीं........

फिर भी कुछ तो हुआ है
नहीं...मैं सही हूँ.....
यह आवाज अमित की थी।

अमित ने आज से कुछ महीने पहले ऐसा ही एक सवाल परुनिशा से भी पूछा था लेकिन जवाब आज तक नहीं मिला।

तुम्हे पता है कि शहर में क्या चल रहा है।
क्या चल रहा है..?

कल किसी ने एक मुसलमान लड़के को मार कर फेंक दिया है। अमित ने जवाब दिया।
लेकिन क्यों ?
क्योंकि उसने एक लड़की से प्रेम किया और वो लड़की और कोई नहीं हमारे शहर के दीनदयाल शर्मा की बेटी थी।
वही दीनदयाल।
सत्तारुढ़ दल के नेता और हमारे राज्य के मंत्री हैं ?
हाँ...

अमित और परुनिशा दोनों ही अब खामोश थे...

जारी..................

Comments

Udan Tashtari said…
सुन्दर प्रवाह..बाँध रही है कहानी..अगली कड़ी का इन्तजार है.

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