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कल मुंबई दौड़ेगी लेकिन मैं

कुछ दिनों पहले मेरी ही कंपनी से एक ई मेल आया कि यदि आप मुंबई मैराथन में भाग लेना चा‍हते हैं तो ई मेल के साथ भेजे गए फार्म को भर कर फारवर्ड कर दें। इस बात को करीब दो महीने होने को आए। मैने ई मेल का जवाब नहीं दिया लेकिन अब थोड़ा अफसो हो रहा है कि यार आशीष तूने क्‍यों नहीं भाग लिया। खैर समय बीत चुका है और कल मुंबई दौड़ेगी और मैं शायद अपने घर पर सोता रहूंगा या‍ फिर मुंबई के लोगों को दौड़ता देखने के लिए जाऊंगा। पता नही।

खैर इस समय यह शहर पूरी तरह दौड़ने के लिए तैयार है। मुंबई के आजाद मैदान से शुरु होकर यह मैराथन बांद्रा तक जाएगी यानि करीब 40 किलोमीटर से अधिक की दौड़। मीडिया से लेकर लोकल ट्रेन तक में हर जगह इस मैराथन का रंग दिख रहा है। जगह जगह होर्डिंग्स लगाए गए हैं और इस पर शहर के आम लोगों को जगह दी गई है। पिछले साल वर्षों से एशिया की सबसे बड़ी मैराथन मुंबई में ही आयोजित की जा रही है। अनुमान है कि इस बार इसमें 33 हजार लोग दौड़ेंगे। अनिल अंबानी, राहुल बोस, तीस्‍ता सीतलवाड़ से लेकर मुंबई के हवलदार, टैक्‍सी चालक और बुर्जुग लोग भी इसमें दौड़ेंगे।

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यह तो सब जानते हैं
मैं भी और आप भी
लेकिन इसे क्या कहेंगे आप
जब आपका सबसे प्यारा दोस्त
आपके साथ वो करे
जो दुश्मन भी नहीं करता है
जी हाँ मैं अपने सबसे प्यारे दोस्त की बात कर रहा हूँ
मैंने उसकी दोस्ती को इबारत समझा
और उसने हर मोड़ पर मुझे ठगा
मैं आज भी उसपर विश्वास करना चाहता हूँ
लेकिन करूँ या नहीं करूँ
अजीब सी उलझन है

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'सराहा' दुनियाभर में तहलका मचाने के बाद अब हिंदुस्तान में छा गया है। जिसे देखिए, वो इसका दीवाना बन चुका है। सऊदी अरब में बनाए गए एप सराहा को दुनियाभर में यूजर्स काफी पसंद कर रहे हैं । करीब एक महीने पहले लॉन्च हुए इस एप को 50 लाख से ज्यादा बार डाउनलोड किया गया है। खास बात यह है कि एप बनाने वाली इस स्टार्टअप को सिर्फ तीन लोग चलाते हैं। इनमें 29 साल के जेन अल-अबीदीन तौफीक और उनके दो दोस्त शामिल हैं।  इस एप के जरिये यूजर अपनी प्रोफाइल से जुड़े किसी भी व्यक्ति को मैसेज भेज सकते हैं। लेकिन सबसे मजेदार यह है कि मैसेज पाने वाले को यह पता नहीं चलेगा कि ये मैसेज किसके पास से आया है। जाहिर है, इसका जवाब भी नहीं दिया जा सकता। और यही कारण है कि ये ऐप लोगों के बीच बहुत तेज़ी से लोकप्रिय होता जा रहा है। सराहा एक अरबी शब्द है, जिसका मतलब ‘ईमानदारी’ होता है। तौफिक ने बताया ‘एप बनाने का मकसद यह है कि इसके जरिये कोई कर्मचारी, बॉस या वरिष्ठ को बिना झिझक अपनी राय दे सके। यूजर किसी व्यक्ति से वो सब कह सकें जो उनके सामने आकर नहीं कह सकते। ऐसा हो सकता है कि वे जो कह रहे हैं उसे सुनना उन्हें अच्छा न ल…

चारों ओर कब्र, बीच में दुनिया का इकलौता शिव मंदिर

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