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कविता या कूड़ा

कविताओं का अपना ही संसार होता है। कुछ के लिए कुछ लाइने कविता बन जाती है तो किसी के लिए यह उनके अनुभव होते हैं। मुझे नहीं पता है कि कविता किसे कहेंगे। कविता लिखने के लिए क्‍या किसी अनुभव से होकर गुजरना जरुरी है। कुछ कहेंगे हां और कुछ कहेंगे नहीं। लेकिन कविता तो आपके आसपास रोजाना घटती है। बस उसे शब्‍दों में ढालने की जरुरत है। अब आप ही बताएं कि यहां जो कविताएं है उसे कविता कहें या कूड़ा। आप की जो भी राय होगी, वो सर आंखों पर।

Comments

Raviratlami said…
हमारा विश्वास कीजिए, ये कूड़े हमें बहुत भाए. कुछ पढ़े कुछ पढ़ रहे हैं. आज्ञा दें तो कुछ रचनाकार में फिर से छापें या रचनाकार के लिए दो-चार दर्जन भर नई कविताएँ भेजें.

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आपके साथ वो करे
जो दुश्मन भी नहीं करता है
जी हाँ मैं अपने सबसे प्यारे दोस्त की बात कर रहा हूँ
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लेकिन करूँ या नहीं करूँ
अजीब सी उलझन है

हम जी रहे हैं। क्यों जी रहे हैं?

हम जी रहे हैं। क्यों जी रहे हैं? इसका जवाब कोई नहीं ढूंढना चाहता। दिल और दुनिया के बीच हर इंसान कहीं न कहीं फंसा हुआ है। मौत आपको आकर चूम लेती और हम दिल और दुनिया के बीच में फंसे रहते हैं। बहुत से लोगों को इसका अहसास तक नहीं होता है कि वो क्या करना चाहते थे और क्या कर रहे हैं। बचपन से लेकर जवानी की शुरूअात तक हर कोई एक सपना देखता है। लेकिन पूरी दुनिया आपके इस सपने के साथ खेलती है और ए‍क दिन हम सब दुनिया के बहाव में बहने लगते हैं। जिस दुनिया में हम अपने हिसाब से जीना चाहते हैं, वहां दुनिया के हिसाब से जीने लगते हैं। यह समाज, यह दुनिया आपके अंदर के उस शख्स को मारने के लिए जी जान से लगी रहती है। बहुत कम लोग होते हैं जो अपने हिसाब से, अपनी खुशी के लिए जीते हैं। हर कोई कहीं न कहीं दिल और दुनिया के बीच में फंसा हुआ है। मैं भी फंसा हुअा हूं और आप भी।