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मीडिया मे नौकरी की तलाश और इन्दौर का एक समाचार पत्र

इन्दौर वासियों को जल्दी ही एक और सुबह का समाचार पत्र मिलने वाला हैं। यह समाचार पत्र राज्य के मुख्य पत्र देनिक भास्कर लॉन्च करने वाला हैं। इस समाचार पत्र का नाम होगा दिव्य किरण। ख़बर मेरे एक खास दोस्त ने दी हैं, इसलिये इसपर भरोसा किया जा सकता हैं। यह खबर उनके लिए भी काम की हैं जो के पत्रकारिता के शिक्षा लेकर बाहर आ चुके हैं या फिर जिन्हे उनकी कंपनी ने बाहर निकाल दिया हैं। दोनो ही तरह के लोगों कि कमी नही हैं। इस मामले में मैं थोडा लकी हूँ कि मुझे अभी तक बहार नही निकला गया हैं। इस लिए मुझे इन्दौर नही जान
होगा लेकिन जिन्हें निकाल दिया हैं वो जरूर भास्कर के दर पर जा सकते हैं।

Comments

Anonymous said…
sorry..is khabar par jo comment post kiya tha,wo galati se niche wali news me post ho gaya hai..
us par zaroor gaur farmayein...ashish ji
आशीष said…
bhai..kam se kam naam bataa dete to accha lagta..
Anonymous said…
dhanyawad ashish ji...
media ke ksehtra me BEROZGAR logo ko ye khabar dene ke liye..
lekin shayad ap ye bhul gaye hain ki media ke bare me suchnaye ekatra karne me kewal aap hi sajag nahi hai..balki wo log jinhe job change karna hai ya fir jo job se nikal diye gaye hain,wo in khabaron se puri tarah wakif rahte hain..
akhir wo bhi apki tarah media sejude hain aur journalist hain...
khair apne logo ka itna khalyal rakha..wakai me sarahniy kadam hai..
apne aage likha hai ki apko job se nahi nikala gaya hai..to ye achhi baat hai...bhagwan kare ki aap hamesha safalta ki unchaiyon ko chuen...
आशीष भाई...
पहली ख़तोकिताबत है आपसे.
मनुष्यता को तरज़ीह देता आपका प्रोफ़ाइल देखकर
तबियत हुई कि आपको ख़ुशामदीद कहूं...लिखते रहें खू़ब...दुआएँ मेरी....
इन्दौर में रहता हूँ ...एक और अख़बार ?
एडवरटाइज़िंग एजेन्सी चलाता हूँ और बारह तेरह अख़बार,तीन एफ़ एम चैनल्स (चौथी...सन एफ़ एम भी जल्द ही)और स्थानीय टीवी चैनल्स और हाँ शाम के तीन प्रमुख दैनिकों से रोज़ मिलने आने वाले मार्केटिंग प्रतिनिधियों से वैसे ही गुले गुलज़ार हैं हमारे दफ़्तर....अब एक और अख़बार ? तौबा...न जाने क्या होगा.
Anonymous said…
भाई आशीष

यार ब्‍लॉग पर यह तरीका पहली बार देखा कि नौकरी कहां है इस‍की सूचना भी दे रहे हो
वैसे मैंने लिखना तो इसे फीडबैक में ही शुरू किया था ब्‍लाग में पर मैंने सोचा कि व्‍यक्तिगत पत्र ही लिखा जाए
वो दो दिन से समय नहीं मिल पा रहा था इसलिए ब्‍लाग चैक नहीं कर पाया तुम्‍हारा आज जब बैठा तो
करीब करीब सारे ही पढ डाले एक साथ
अच्‍छा लिखते हो

आज सबसे बडी बात है लिखना
कम से कम लिखकर अपनी व्‍यथा और अनुभव को तो बांट लेते हो
गुड
बधाई
sarvesh said…
khabarchiyo ke liye ye khabar utsahjanak ho sakti hai, kyoki journalisto ki mandi me is tarah ki khabren...puls polio abhiyan ki tarah kaam karti hain. ishwar un akhbarnawiso ka pet pale jo aapki khabar ke sahare bhaskar ko jarj pancham banane pahuch rahe ho...aur bhaskar ke dwar par khade hokar "jan gan man...bhaskar bhagya vidhata.." gaa rahe ho...agar aap unka salary review batate to kuch hamare jaise bhi waha vandan-gaan me shamil hone pahuch jate...aakhir journalist aur sudama me jyada antar thode hi hai..!

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जी हाँ मैं अपने सबसे प्यारे दोस्त की बात कर रहा हूँ
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