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ये है मुम्बई.....यह है मुम्बई

ये है मुम्बई.....यह है मुम्बई
थोड़ा सा पाना है, थोड़ा सा खोना है
फिर भी मुस्कुराते हुए यहीं जीना है
अजीब सी उलझन है
ज़िंदगी में
फिर भी निभाना हैं
कभी आर तो कभी पार
फिर भी हर पल तेरे संग निभाना है
भागते भागते हांफना है
फिर भी थक के थोड़ा और जाना है
रुकना रुकना..रुकना नहीं
थकना थकना यहाँ नहीं
रंग बिरंगे शहर में चलते जाना हैं

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मुंबई पर प्यार अच्छा है....
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हम जी रहे हैं। क्यों जी रहे हैं?

हम जी रहे हैं। क्यों जी रहे हैं? इसका जवाब कोई नहीं ढूंढना चाहता। दिल और दुनिया के बीच हर इंसान कहीं न कहीं फंसा हुआ है। मौत आपको आकर चूम लेती और हम दिल और दुनिया के बीच में फंसे रहते हैं। बहुत से लोगों को इसका अहसास तक नहीं होता है कि वो क्या करना चाहते थे और क्या कर रहे हैं। बचपन से लेकर जवानी की शुरूअात तक हर कोई एक सपना देखता है। लेकिन पूरी दुनिया आपके इस सपने के साथ खेलती है और ए‍क दिन हम सब दुनिया के बहाव में बहने लगते हैं। जिस दुनिया में हम अपने हिसाब से जीना चाहते हैं, वहां दुनिया के हिसाब से जीने लगते हैं। यह समाज, यह दुनिया आपके अंदर के उस शख्स को मारने के लिए जी जान से लगी रहती है। बहुत कम लोग होते हैं जो अपने हिसाब से, अपनी खुशी के लिए जीते हैं। हर कोई कहीं न कहीं दिल और दुनिया के बीच में फंसा हुआ है। मैं भी फंसा हुअा हूं और आप भी।

दोस्ती और विश्वासघात में अन्तर होता है

दोस्ती और विश्वासघात में अन्तर होता है
यह तो सब जानते हैं
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अजीब सी उलझन है

सेक्‍स बनाम सेक्‍स शिक्षा

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