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भरोसे पर टिकती है दुनिया

भरोसे पर टिकती है दुनिया
और दुनिया टिकती है दोस्‍ती पर
भरोसे से ही होते हैं दुनिया के सारे काम
प्‍यार भरोसे की है देन
भरोसे पर कायम है इंसानियत
सब की जड़ में है भरोसे की नींव
जब टूटता है भरोसा
हिल जाती है सारी नींवे
दोस्‍ती दुश्‍मनी में बदलती है
जिंदगी भर साथ चलने वाला
बन जाता है आपकी जिंदगी का दुश्‍मन
ऐसे में बस न टूटे भरोसा
बनी रहे सबकी आशा

Comments

Ashish, kavita ka prayas achh hai .. per phir bhi dost ko yah jarur kahunga.. kavita me tum khud kuchh kahane ki koshish matkaro kavita ko kahane ki azadi do ..yadi tumkahoge to vah ek statement ho jayega... so issase bacho. baharhal likhate hue khud b khud aa gayega...

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