Skip to main content

वो क्‍यूं बेवफा हो गई

अमित पिछले कई दिनों में गांधी होने के मायने को समझने का प्रयास कर रहा है। गांधी की आत्‍मकथा को पढ़ा। गांधी को समझने में उसका व्‍यक्तिगत हित छुपा हुआ है। हर इंसान हमेशा अपने तो दूसरे से बेहतर समझता है। हर इंसान को लगता है कि वो जो बोल रहा है, सोच रहा है, वही सही है। इंसान चाहता है कि उसकी प्रतिष्‍ठा हो। लोग उसकी इज्‍जत करें। उसकी बातों से किसी को तकलीफ न हो। लोग उसे हमेशा एक अच्‍छे इंसान के रुप में पहचाने। अमित भी कईयों की तरह एक बे‍हतर इंसान बनने का प्रयास कर रहा है। लेकिन कहते हैं न कि हर आदमी ने कई आदमी बसते हैं। शुरु से ही अमित का मानना था कि लोगों को साथ लेकर चला जाए। लेकिन यह संभव होता नहीं दिख रहा है। किसी एक को साथ लेने की कोशिश में दूसरे साथी छूट जाते हैं। जिन्‍हें अमित छोड़ना नहीं चाहता है। दोस्‍तों से गलतफहमी होती है तो उसे दूर करने का प्रयास करता है लेकिन दूसरे उसे उसकी कमजोरी समझकर उसका उपहास उड़ाते हैं। लेकिन वो ऐसा नहीं है। उसे फर्क नहीं पड़ता है कि लोग उसके बारें में क्‍या सोचते हैं। लेकिन सही मायने में पड़ता भी है। कामिनी का ऐसे छोड़कर चले जाना उसे बड़ा सता रहा है और अब अमित अपने और उसके बीच पैदा हो रही गलतफहमी को दूर करना चाहता है। इसी लिए का‍मिनी को एक के बाद एक पत्र लिखता है लेकिन उधर से कोई जवाब नहीं आता है।

Comments

Anonymous said…
बेवफा हो नहीं, बल्कि समय हो गया
sadhu said…
आशीष भईया ई अमित को कई कि उसे भूल जाए और कहानी में थोड़ा नया मोड़ लाए। अमित को अब किसी दूसरी लड़की से मिलवा दिजीए
satyendra... said…
अरे महराज.. आप पत्रकार हैं कि कथाकार
अमित के संतोष के लिए यह शे'र किसी ने (ध्यान नहीं आ रहा कि ग़ालिब या किसी और ने) अर्ज किया है-

कुछ तो मज़बूरियां रही होंगी
यूं कोई बेवफ़ा नहीं होता।

बहरहाल, ऐसे मिजाज़ में गांधी को पढ़ना बड़ी बात है। जितना खोया है, उससे कुछ ज्यादा लेकर लौटेगा, इसकी मुझे पूरी उम्मीद है।
यह शे'र बशीर बद्र का है भाई, कन्फर्म कर लिया। आपके अलावा चला ग़ालिब भी माफ़ करें।

Popular posts from this blog

दोस्ती और विश्वासघात में अन्तर होता है

दोस्ती और विश्वासघात में अन्तर होता है
यह तो सब जानते हैं
मैं भी और आप भी
लेकिन इसे क्या कहेंगे आप
जब आपका सबसे प्यारा दोस्त
आपके साथ वो करे
जो दुश्मन भी नहीं करता है
जी हाँ मैं अपने सबसे प्यारे दोस्त की बात कर रहा हूँ
मैंने उसकी दोस्ती को इबारत समझा
और उसने हर मोड़ पर मुझे ठगा
मैं आज भी उसपर विश्वास करना चाहता हूँ
लेकिन करूँ या नहीं करूँ
अजीब सी उलझन है

#DigitalGyan : Sarahah के बारे में जानिए सबकुछ

'सराहा' दुनियाभर में तहलका मचाने के बाद अब हिंदुस्तान में छा गया है। जिसे देखिए, वो इसका दीवाना बन चुका है। सऊदी अरब में बनाए गए एप सराहा को दुनियाभर में यूजर्स काफी पसंद कर रहे हैं । करीब एक महीने पहले लॉन्च हुए इस एप को 50 लाख से ज्यादा बार डाउनलोड किया गया है। खास बात यह है कि एप बनाने वाली इस स्टार्टअप को सिर्फ तीन लोग चलाते हैं। इनमें 29 साल के जेन अल-अबीदीन तौफीक और उनके दो दोस्त शामिल हैं।  इस एप के जरिये यूजर अपनी प्रोफाइल से जुड़े किसी भी व्यक्ति को मैसेज भेज सकते हैं। लेकिन सबसे मजेदार यह है कि मैसेज पाने वाले को यह पता नहीं चलेगा कि ये मैसेज किसके पास से आया है। जाहिर है, इसका जवाब भी नहीं दिया जा सकता। और यही कारण है कि ये ऐप लोगों के बीच बहुत तेज़ी से लोकप्रिय होता जा रहा है। सराहा एक अरबी शब्द है, जिसका मतलब ‘ईमानदारी’ होता है। तौफिक ने बताया ‘एप बनाने का मकसद यह है कि इसके जरिये कोई कर्मचारी, बॉस या वरिष्ठ को बिना झिझक अपनी राय दे सके। यूजर किसी व्यक्ति से वो सब कह सकें जो उनके सामने आकर नहीं कह सकते। ऐसा हो सकता है कि वे जो कह रहे हैं उसे सुनना उन्हें अच्छा न ल…

चारों ओर कब्र, बीच में दुनिया का इकलौता शिव मंदिर

Ashish Maharishi
वाराणसी। दुनिया के सबसे पुराने शहरों में शुमार बनारस के बारे में मान्यता है कि यहां मरने वालों को महादेव तारक मंत्र देते हैं, जिससे मोक्ष लेने वाला कभी भी दोबारा गर्भ में नहीं पहुंचता। इसी बनारस में एक ऐसा मंदिर भी है जो कब्रिस्तान के बीचोंबीच है। ओंकारेश्वर महादेव मंदिर भले ही हजारों साल पुराना हो, लेकिन बनारस के स्थानीय लोगों को भी इसके बारे में बहुत कम जानकारी है।
मंदिर के पुजारी शिवदत्त पांडेया के अनुसार, "काशी खंड में ओंकारेश्वर महादेव का जिक्र है। ये मंदिर करीब पांच हजार साल पुराना है। यहां दर्शन से अश्वमेघ यज्ञ का फल मिलता है, तीर्थ माना गया है लेकिन आज कभी कोई भूला-बिसरा यहां दर्शन करने आ जाता है। वरना ये मंदिर हमेशा सुनसान ही रहता है।"

स्कंद पुराण में ओंकारेश्वर महादेव का जिक्र है। इस पुराण के अनुसार, काशी में जब ब्रह्मा जी ने हजारों साल तक भगवान शिव की तपस्या की, तो शिव ने ओंकार रूप में प्रकट होकर वर दिया और इसी महालिंग में लीन हो गए।
ग्रंथों के मुताबिक, एक विशेष दिन सभी तीर्थ ओंकारेश्वर दर्शन के लिए आते हैं। लेकिन इस मंदिर से जिला प्रशासन और सरकार दोन…