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मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही हो कहीं भी आग लेकिन जलनी चाहिए

बडे दिनों से इच्छा थी कि एक नया ब्लाग शुरू किया जाएँ जिसमे केवल और केवल काम कि बातें हो। इसी के तहत आज बोल हल्ला की शुरुआत हो गई हैं। इसका मुख्य उद्देश्य मीडिया, आम आदमी से जुडे मुद्दे और कुछ नया करना हैं जो कि कहीँ होता दिख नहीं रहा हैं। मुझे यकीं हैं आप लोगों कि सहायता से कुछ कहा और किया जा सकता हैं। मेरे ब्लोग का लिंक http://bolhalla.blogspot.com/ हैं । मुझे आपके सुझाव का इन्तजार रहेगा। मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही हो कहीं भी आग लेकिन जलनी चाहिए

Comments

Mired Mirage said…
ऐसे प्रयास के लिए बधाई व शुभकामनाएँ ।
घुघूती बासूती
आशीष said…
shukriya
आशीष said…
sanjay ji aur mirage ji shukriya mera housla badane ke liye..bus aap jese logon ka sath chahiye
आशीष जी आपने जो विचार व्‍यक्त किये है ऐसी ही विचारधारा की आज महतो आवश्‍यकता है । आशा है आगे भी इसी सोच के साथ आप उपलब्ध होगें ।
धन्‍यवाद ।

शशिकान्‍त अवस्‍थी
पटकापुर कानपुर ।

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हम जी रहे हैं। क्यों जी रहे हैं? इसका जवाब कोई नहीं ढूंढना चाहता। दिल और दुनिया के बीच हर इंसान कहीं न कहीं फंसा हुआ है। मौत आपको आकर चूम लेती और हम दिल और दुनिया के बीच में फंसे रहते हैं। बहुत से लोगों को इसका अहसास तक नहीं होता है कि वो क्या करना चाहते थे और क्या कर रहे हैं। बचपन से लेकर जवानी की शुरूअात तक हर कोई एक सपना देखता है। लेकिन पूरी दुनिया आपके इस सपने के साथ खेलती है और ए‍क दिन हम सब दुनिया के बहाव में बहने लगते हैं। जिस दुनिया में हम अपने हिसाब से जीना चाहते हैं, वहां दुनिया के हिसाब से जीने लगते हैं। यह समाज, यह दुनिया आपके अंदर के उस शख्स को मारने के लिए जी जान से लगी रहती है। बहुत कम लोग होते हैं जो अपने हिसाब से, अपनी खुशी के लिए जीते हैं। हर कोई कहीं न कहीं दिल और दुनिया के बीच में फंसा हुआ है। मैं भी फंसा हुअा हूं और आप भी।

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दोस्ती और विश्वासघात में अन्तर होता है
यह तो सब जानते हैं
मैं भी और आप भी
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आपके साथ वो करे
जो दुश्मन भी नहीं करता है
जी हाँ मैं अपने सबसे प्यारे दोस्त की बात कर रहा हूँ
मैंने उसकी दोस्ती को इबारत समझा
और उसने हर मोड़ पर मुझे ठगा
मैं आज भी उसपर विश्वास करना चाहता हूँ
लेकिन करूँ या नहीं करूँ
अजीब सी उलझन है