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क्या आपको अच्छे पत्रकारों की जरूरत हैं

यह पोस्ट मैं एक खास उद्देश्य से लिख रहा हूँ। जहाँ तक मेरी जानकारी है इस तरह की पोस्ट पहले कभी नहीं लिखी गई होगी। कह सकते हैं कि यह एक सकारात्मक पोस्ट हैं। और शायद मेरे इस प्रयास से मेरे उन कई साथियों को नौकरी मिल सकती है जो दिल्ली में नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं। चलिए मैं अपनी बात शुरू करता हूं मेरे कई दोस्त जो इस समय दिल्ली और भोपाल में हैं, उन्हें मीडिया में नौकरी की तलाश है। मेरे इन दोस्तों ने माखन लाल पत्रकारिता विश्वविधालय से पत्रकारिता में दो साल की मास्टर डिग्री ली हैं। ये सभी नौजवान हैं और मीडिया के माध्यम से कुछ करना चाहते हैं, इसमें से कई हालांकि किसी न किसी प्रैस या चैनल से जुड़े हुए हैं। यदि आपके संस्थान में इन्हें एक मौका मिले तो ये पत्रकारिता जगत को काफी कुछ नयापन दे सकते हैं और शायद आज इस तरह के ही पत्रकारों की जरूरत हैं जो आ‍इडिया से भरे हुए हों। यदि अपके संस्थान को अच्छे लोगों की जरूरत हैं तो आप मुझे ९८६७५-७५१७६ या ashish.maharishi@gmail.com पर मेल भी कर सकता हैं.

Comments

Rama said…
आशीष जी आपकी सोच तो अच्छी है लेकिन किसी के प्रदर्शन का पैमाना आप न बने. २ साल की मास्टर डिग्री महत्वपूर्ण नहीं होती है. मैंने कई संपादकों के साथ काम किया है लेकिन उन्होंने कोई कोर्स नहीं किया लेकिन .... उनका जवाब नहीं वहीं कोर्स करने वाले तो यह तक नहीं जानते कि समाचार क्या होता है. समाचार संकलन कैसे किया जाता है ... आदि ....
आशा है आप अन्यथा नहीं लेंगे.
आशीष जी, do you know me I am woring in university of journalism

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यह तो सब जानते हैं
मैं भी और आप भी
लेकिन इसे क्या कहेंगे आप
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आपके साथ वो करे
जो दुश्मन भी नहीं करता है
जी हाँ मैं अपने सबसे प्यारे दोस्त की बात कर रहा हूँ
मैंने उसकी दोस्ती को इबारत समझा
और उसने हर मोड़ पर मुझे ठगा
मैं आज भी उसपर विश्वास करना चाहता हूँ
लेकिन करूँ या नहीं करूँ
अजीब सी उलझन है

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लेकिन यह हमारा दोगलापन ही है कि हम घर की छतों और तकियों के नीचे बाबा मस्‍तराम और प्‍ले बाय जैसी किताबें रख सकते हैं लेकिन जब इस पर बात करने की आएगी तो हमारी जुबां बंद हो जाती है। हम दुनियाभर की बात कर सकते हैं, नेट से लेकर दरियागंज तक के फुटपाथ पर वो साहित्‍य तलाश सकते हैं जिसे हमारा सम…

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Ashish Maharishi
वाराणसी। दुनिया के सबसे पुराने शहरों में शुमार बनारस के बारे में मान्यता है कि यहां मरने वालों को महादेव तारक मंत्र देते हैं, जिससे मोक्ष लेने वाला कभी भी दोबारा गर्भ में नहीं पहुंचता। इसी बनारस में एक ऐसा मंदिर भी है जो कब्रिस्तान के बीचोंबीच है। ओंकारेश्वर महादेव मंदिर भले ही हजारों साल पुराना हो, लेकिन बनारस के स्थानीय लोगों को भी इसके बारे में बहुत कम जानकारी है।
मंदिर के पुजारी शिवदत्त पांडेया के अनुसार, "काशी खंड में ओंकारेश्वर महादेव का जिक्र है। ये मंदिर करीब पांच हजार साल पुराना है। यहां दर्शन से अश्वमेघ यज्ञ का फल मिलता है, तीर्थ माना गया है लेकिन आज कभी कोई भूला-बिसरा यहां दर्शन करने आ जाता है। वरना ये मंदिर हमेशा सुनसान ही रहता है।"

स्कंद पुराण में ओंकारेश्वर महादेव का जिक्र है। इस पुराण के अनुसार, काशी में जब ब्रह्मा जी ने हजारों साल तक भगवान शिव की तपस्या की, तो शिव ने ओंकार रूप में प्रकट होकर वर दिया और इसी महालिंग में लीन हो गए।
ग्रंथों के मुताबिक, एक विशेष दिन सभी तीर्थ ओंकारेश्वर दर्शन के लिए आते हैं। लेकिन इस मंदिर से जिला प्रशासन और सरकार दोन…