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जारी हैं पत्रकारों का आना जाना

खबर हैं कि दिव्य भास्कर, मुम्बई के बिजनेस रिपोर्टर चन्द्र कान्त जानी ने मुम्बई में ही किसी ब्रोक्रेज फ़र्म में जाने वाले हैं। सहारा समय, मुंबई के रिपोर्टर राजीव रंजन ने अब जी बिज़नेस, मुंबई में ज्वाइन कर लिया है। जबकि अजय शुक्ला ने हिंदुस्तान कानपुर में बतौर डिप्टी न्यूज एडीटर ज्वाइन कर लिया है। इससे पहले वे दैनिक जागरण में कार्यरत थे।

इसी तरह दिनेश श्रीनेत्र ने आईनेक्स्ट लखनऊ से बेंगलूर में एक मीडिया हाउस को ठीकठाक पैकेज पर ज्वाइन किया है। जबकी स्टार न्यूज चैनल के भोपाल संवाददाता ब्रजेश राजपूत ने बीएजी ज्वाइन कर लिया है। दोस्तो का कहना हैं शेफाली ने सहारा मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ छोड़कर एमएच वन ज्वाइन किया है। वहीँ सहारा के ही भरत शास्त़्री ने लाइव इंडिया ज्वाइन कर लिया है।

( यह खबर भडास से ली गई हैं।)

Comments

Anonymous said…
Dainid hindustan, New Delhi ke senior news editor Gangesh Mishra ab Amar Ujala Noida me Editor input ke pad par join karenge 23 september ko. Pl enclude this news.
neeshoo said…
जानकारी अच्छी लगी

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#DigitalGyan : Sarahah के बारे में जानिए सबकुछ

'सराहा' दुनियाभर में तहलका मचाने के बाद अब हिंदुस्तान में छा गया है। जिसे देखिए, वो इसका दीवाना बन चुका है। सऊदी अरब में बनाए गए एप सराहा को दुनियाभर में यूजर्स काफी पसंद कर रहे हैं । करीब एक महीने पहले लॉन्च हुए इस एप को 50 लाख से ज्यादा बार डाउनलोड किया गया है। खास बात यह है कि एप बनाने वाली इस स्टार्टअप को सिर्फ तीन लोग चलाते हैं। इनमें 29 साल के जेन अल-अबीदीन तौफीक और उनके दो दोस्त शामिल हैं।  इस एप के जरिये यूजर अपनी प्रोफाइल से जुड़े किसी भी व्यक्ति को मैसेज भेज सकते हैं। लेकिन सबसे मजेदार यह है कि मैसेज पाने वाले को यह पता नहीं चलेगा कि ये मैसेज किसके पास से आया है। जाहिर है, इसका जवाब भी नहीं दिया जा सकता। और यही कारण है कि ये ऐप लोगों के बीच बहुत तेज़ी से लोकप्रिय होता जा रहा है। सराहा एक अरबी शब्द है, जिसका मतलब ‘ईमानदारी’ होता है। तौफिक ने बताया ‘एप बनाने का मकसद यह है कि इसके जरिये कोई कर्मचारी, बॉस या वरिष्ठ को बिना झिझक अपनी राय दे सके। यूजर किसी व्यक्ति से वो सब कह सकें जो उनके सामने आकर नहीं कह सकते। ऐसा हो सकता है कि वे जो कह रहे हैं उसे सुनना उन्हें अच्छा न ल…

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दोस्ती और विश्वासघात में अन्तर होता है
यह तो सब जानते हैं
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जी हाँ मैं अपने सबसे प्यारे दोस्त की बात कर रहा हूँ
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और उसने हर मोड़ पर मुझे ठगा
मैं आज भी उसपर विश्वास करना चाहता हूँ
लेकिन करूँ या नहीं करूँ
अजीब सी उलझन है

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हम जी रहे हैं। क्यों जी रहे हैं? इसका जवाब कोई नहीं ढूंढना चाहता। दिल और दुनिया के बीच हर इंसान कहीं न कहीं फंसा हुआ है। मौत आपको आकर चूम लेती और हम दिल और दुनिया के बीच में फंसे रहते हैं। बहुत से लोगों को इसका अहसास तक नहीं होता है कि वो क्या करना चाहते थे और क्या कर रहे हैं। बचपन से लेकर जवानी की शुरूअात तक हर कोई एक सपना देखता है। लेकिन पूरी दुनिया आपके इस सपने के साथ खेलती है और ए‍क दिन हम सब दुनिया के बहाव में बहने लगते हैं। जिस दुनिया में हम अपने हिसाब से जीना चाहते हैं, वहां दुनिया के हिसाब से जीने लगते हैं। यह समाज, यह दुनिया आपके अंदर के उस शख्स को मारने के लिए जी जान से लगी रहती है। बहुत कम लोग होते हैं जो अपने हिसाब से, अपनी खुशी के लिए जीते हैं। हर कोई कहीं न कहीं दिल और दुनिया के बीच में फंसा हुआ है। मैं भी फंसा हुअा हूं और आप भी।