1 June 2011

हाथ छूटे, रिश्ते छूटे


कल तक मैं और तुम हम थे
कल तक हमारे सपने एक थे
कल तक हम दो जिस्म एक जान थे
कल तक तुम्हारी नजरों से मैं दुनिया देखता था
कल तक हम सिर्फ हम थे
कल तक पूरी दुनिया से हम अनजान थे
कल तक मुझमें तुम और तुममें मैं था

आज सबकुछ बदल गया
मैं मैं नहीं रहा, तुम तुम नहीं रही
सपने बिखरे, हाथ छूटे
कल तक जो हम थे
आज मैं और तुम हो गए
आज भी दुनिया देखता हूं
बस अपनी नजरों से
आज दुनिया अनजान नहीं रही
साथ छूटा, रिश्ता टूटा
हम में से तुम हट गई
तो हम मैं बन गया

4 comments:

Anonymous said...

I like it

rabindra said...

riston ka tootna aur unka shootna. ye zindge se hamere bandhan ko aur majboot banati hai. ye bhi zindgi ke behad aham pehlu hai.

rabindra said...

zindi me riston ka tootna aur unka shootna ye hame zindge ke aur kareeb le jaata.
zindgi me jitne khushiyan jaroore hain gam bhi utna he zaroore hai.

राकेश कौशिक said...

सोच को शब्द देने का सार्थक प्रयास - शुभकामनाएं