13 June 2011

लेकिन उसकी आंखों की बारिश को कोई नहीं देख पा रहा था

आज फिर बदरा फिर बरसे। झूम-झूम कर बरसे। लेकिन इस बार उसने खुद को इन आवारा बादलों से बचा लिया था। बाहर भले ही बारिश हो रही थी लेकिन उसकी आंखों में रिमझिम आंसू थे। बादलों को बरसते हुए देखकर वह अतीत में लौट चुकी थी। एक ऐसा अतीत जिसकी खूबसूरत यादों को वह संभाल कर नहीं रख सकती थी। पहली बार उन दोनों की मुलाकात एक बारिश में हुई थी। अंधेरी वेस्ट के उस बस स्टैंड पर वह खुद को बारिश से भगाने की असफल कोशिश कर रही थी। लेकिन जैसे पूरे बारिश का पानी उसे भिगोने के लिए ही बरस रहा था। वह पूरी तरह भीग चुकी थी। पास में ही खड़ा अमित बार-बार नजरें चुरा कर उसे देख रहा था। वह भी उसे तिरछी नजरों से उसे ही देख रही थी। अमित ने सोचा कि बात की जाए या नहीं। कई मिनटों तक वह इस उधेड़बुन में लगा रहा। अंत में हिम्मत कर उसने अपना छाता उसकी ओर बढ़ा दिया। यह देखकर वह सकपका गई। लेकिन उसने मना नहीं किया। बस यह उनकी पहली मुलाकात थी। बारिश थमी और दोनों के रास्ते जुदा हो गए। वह चर्च गेट की लोकल पकड़कर चली गई। जबकि अमित ने मलाड लोकल को पकड़ा। इसके बाद स्टेशन पर हर रोज लाखों लोग अपने सफर के लिए उतरते और चढ़ते रहे। लेकिन अमित कहीं भी नहीं था। वह जा चुका था। वह हर रोज उसी बस स्टॉप पर उसकी राह देखती रही। पूरे एक साल बाद आज फिर बादल बरसे। लेकिन इस बार कोई उसे इन बारिश की बूंदों से बचाने के लिए वहां नहीं खड़ा था। पूरी दुनिया ने बादलों को बरसते देखा लेकिन उसकी आंखों की बारिश को कोई नहीं देख पा रहा था। वह लगातार रोई जा रही थी। लेकिन आखिर क्यों?

2 comments:

कौशलेन्द्र said...

क्योंकि उसे आज भी अमित के लौटने का इंतजार है...और आपको अमित को वापस लाना ही होगा...नहीं तो कहानी आगे कैसे बढ़ेगी..

Neeloo said...

Samay ka pahiya wapis kaise mudhega???? Usse sapno se nikalkar hakkikat ka rukh kana chahiye....Amit ka intzaar chhod kar aage kadam badman chahiye, jahan ek nayi duniya Uska betabi se uska intzaar har ghadi kar rahi hai!!!!!